बुधवार, 22 सितंबर 2021

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एक प्रयास सादर

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हृदय में साथ रहकर मुस्कुराती बात बचपन की
कभी जब याद आ जाती मुझे बरसात बचपन की।1।

चमकती दामिनी के संग बादल का गरज जाना
छिपे माँ की रजाई में निराली रात बचपन की।2।

बरसने से भरी गलियाँ भरे वो खेत चौबारे
चलाना नाव कागज की बड़ी सौगात बचपन की।3।

चने के चार दाने भी बखूबी बाँटकर खाना
नहीं था भेद आपस में न कोई जात बचपन की। 4।

लगाकर शर्त बारिश में गली तक दौड़कर जाना
अभी तक याद है मुझको मिली वो मात बचपन की।5।

शर्मिला चौहान

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