युद्ध नहीं आसान
देख लो पन्ने पलट कर, युद्ध बस नुकसान है।
भूख मृत्यु और आँसू, हर तरफ श्मशान है।।
चल दिए घर से निकल कर, लौट न पाए कभी।
बच्चे बूढ़े औरतें, भुक्तभोगी हैं सभी।
ज़िंदगी फिर से बसाना, इतना क्या आसान है?
देख लो पन्ने पलट कर, युद्ध बस नुकसान है।।1।।
द्रोन, बम, मिसाइलें, हैं धधकती हर घड़ी।
ढ़ेर मलबों का बढ़ा, छोटी मानवता पड़ी।
युद्ध लड़ते देश पर, मरता तो बस नादान है,
देख लो पन्ने पलट कर, युद्ध बस नुकसान है।।2।।
वीरता का खून करती, भस्म क्षण में सब करे।
एक दो नहीं सैकड़ों, एक क्षण में हैं मरे।
जीव जंतु प्राणियों का, हो रहा अवसान है,
देख लो पन्ने पलट कर, युद्ध बस नुकसान है।।3।।
गिद्ध, चील, कौओं का, चल रहा महाभोज है।
सत्ता शक्तिशालियों की, और कुछ की होड़ है।
लोभ, पद की लालसा ने, छीनी कई संतान हैं,
देख लो पन्ने पलट कर, युद्ध बस नुकसान है।।4।।
श्रेष्ठ खुद को है समझता, शक्ति का भंडार जो।
दूसरों को है मिटाता, रचता खुद संसार वो।
सृष्टि और मानव के मध्य, मचा यह घमासान है,
देख लो पन्ने पलट कर, युद्ध बस नुकसान है।।5।।
लुटती इज्जत औरतों की, बच्चे मरते रात दिन।
बूढ़ों ने रोकी हैं सांसें, लोग हैं परिवार बिन।
सबने झेला युद्ध को, जापान और ईरान है,
देख लो पन्ने पलट कर, युद्ध बस नुकसान है।।6।।
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