आदरणीय अनिल सर एवं सभी साथियों के समीक्षार्थ प्रस्तुत है मेरा प्रयास 🙏 आप सबकी ग़ज़लों से पटल खूबसूरत लग रहा है।
फ़िलबदीह-63
दूसरा चरण
221 2121 1221 212
रखती सभी का हर घड़ी सच्चा हिसाब है
कहते हैं ज़िंदगी जिसे ये वो किताब है।।1।।
हर कामयाब आदमी बूझे सवाल खुद
जिसने सबक नहीं लिया वो ही ख़राब है।।2।।
कांटों के बीच राह बनाते चले चलो
जो अंत तक निभा सको जीवन गुलाब है।।3।।
कोई कहे नशा इसे कोई सज़ा कहे
ये है दवा किसी के लिए ये शराब है।।4।।
बाहर जो ढूंढते रहे अपने में ही मिली
ढूंढे जो खुद में ही खुशी वो कामयाब है।।5।।
गंगा सी तेज़ हो कभी सरयू सी मंद हो
ये ही तो ज़िंदगी का लुब्बे-लुबाब है।।6।।
औरों की भेड़चाल से बचकर चलें यहाँ
अपने ही दम पे जो जिया वो ही जनाब है।।7।।
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शर्मिला चौहान
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