1222 1222 1222 1222
जिगर में जब तलक थोड़ा सा भी ईमान ज़िंदा है
तभी तक आदमी के जिस्म में इंसान ज़िंदा है।।1।।
बड़े मजबूर हो रहते हैं दो कमरों के घर में अब
अभी भी दिल में बचपन का बड़ा दालान ज़िंदा है।।2।।
नमी दिखती नहीं है अब लबों की मुस्कराहट में
दिलों में आज बस रिश्तों का रेगिस्तान ज़िंदा है।।
भुलाया ही नहीं जा सकता मीरा सूर राधा को
हैं जब तक कृष्ण यादों में तो फिर रसखान ज़िंदा है।।4।।
सनातन सत्य है धरती की खातिर जान दे देना
अभी भी है जहाँ गोरी वहाँ चौहान ज़िंदा है।।5।।
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शर्मिला चौहान
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