बुधवार, 22 सितंबर 2021

2122 1122 1122 22

गृहकार्य समीक्षार्थ 🙏 सुझाव के अनुसार संशोधन के बाद।

2122 1122 1122 22

स्वार्थ के बीज हमेशा जो बशर बोता है
देख औरों की खुशी खूब वही रोता है।।1।

हौसला सीख विहग से रे मनुज तू जग में
क्यों सुबह देर तलक ओढ़ के तू सोता है।।2।।

प्रेम की राह कठिन यह तो पता है सब को
जब मिलें हाथ तभी साथ सफल होता है।।3।।


चोट दुनिया ने बहुत बार दिए जो तुझको
घाव सीने पे लिए आज तलक ढोता है।।4।।

खूब खुशियों से भरा आज है दामन तेरा
चंद बातों में उलझ क्यों तू खुशी खोता है।।5।।

शर्मिला चौहान

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें