मुसलसल गज़ल
212 212 212 212
रदीफ़- लगे
क़ाफ़िया- आने
हौसलों से भरे गीत गाने लगे
शूर अपनी कहानी सुनाने लगे।1।
शाम चौपाल पर बैठ कर गांँव की
जिंदगी के तजुर्बे बताने लगे। 2।
याद करके पुरानी सभी जंग को
मूँछ पर हाथ अपने फिराने लगे। 3।
टाँग टूटी रही पर थमे वो नहीं
ले सहारा उठे मुस्कुराने लगे। 4।
जन्म लेकर सदा प्राण अर्पित करें
भारती से यही वो मनाने लगे। 5।
शर्मिला चौहान
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