गृहकार्य समीक्षार्थ 🙏 सुझाव के अनुसार संशोधन के बाद।
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स्वार्थ के बीज हमेशा जो बशर बोता है
देख औरों की खुशी खूब वही रोता है।।1।
हौसला सीख विहग से रे मनुज तू जग में
क्यों सुबह देर तलक ओढ़ के तू सोता है।।2।।
प्रेम की राह कठिन यह तो पता है सब को
जब मिलें हाथ तभी साथ सफल होता है।।3।।
चोट दुनिया ने बहुत बार दिए जो तुझको
घाव सीने पे लिए आज तलक ढोता है।।4।।
खूब खुशियों से भरा आज है दामन तेरा
चंद बातों में उलझ क्यों तू खुशी खोता है।।5।।
शर्मिला चौहान
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