बुधवार, 22 सितंबर 2021

221 2122 221 2122 की बहर

गृहकार्य प्रथम प्रयास 🙏

221  2122  221  2122

रदीफ़- ले
क़ाफ़िया- आ


सारे भरम हृदय के अपने ज़रा मिटा ले
जो राह सामने है  उस पर कदम बढ़ा ले।1।

नवपुष्प खिल उठें जब तब शाख मुस्कुराए
गम भूलकर जहाँ के जी भर के खिलखिला ले।।2।

तू छोड़ आ गया था वो गाँव याद करता
अब लौट चल वहीं फिर अपना उसे बना ले।।3।।

संसार रूप सागर जो दे रहा चुनौती
कश्ती चला के अपनी  हिम्मत को आज़मा ले।।4।।

वो नाच जो नचाता, सब नाचते उसी पर
तू ताल पे उसी की अपने कदम मिला ले।।5।।

शर्मिला चौहान

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