शनिवार, 2 अक्टूबर 2021

1212 1122 1212 22 पर गज़ल

प्रथम प्रयास समीक्षार्थ 🙏

रदीफ़_होती है
क़ाफ़िया_ आर

1212  1122  1212  22

धरा गगन के लिए बेकरार होती है
बरस पड़े जो गगन तो बहार होती है।।1।।

सभी को जीत मिले खेल में कहां मुमकिन
कई जीतों में छिपी मौन हार होती है।।2।।

निकल चला ये समय तेज़ रोक लो इसको
पलक झपकते उमर साठ पार होती है।।3।।

प्रवाह साथ तो आसान तैरकर जाना
कठिन मगर हो जो विपरीत धार होती है।।4।।

लबों की चुप्पी वो नज़रें झुकी हुई उनकी
यही अदा तो सनम दिल के पार होती है।।5।।

शर्मिला चौहान

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