शुक्रवार, 15 जनवरी 2021

अरिमर्दन ( वीरता गीत)

"अरिमर्दन"

गर्जन, तर्जन, शक्ति प्रचंड, शौर्य धारा बहती निरंतर।
माँ भारती के सच्चे सपूत, सीमा पर करते अरिमर्दन।।

१)
निडर, नि:शंक, नि:संकोच खड़ा,
पल पल रक्षे अपनी धरा।
आंधी, तूफान, हिमपात बड़े
हर मुश्किल में भी डटा रहे।
तिरंगा परचम लहराए सदा,
जय भारती जयघोष सर्वदा।
विजय तिलक भाल बिराजे
कंधे पर बंदूक है साजे।

प्रशस्त पुण्य पंथ पर, अविराम चले हुंकार भरे।
भारत सपूत हर सीमा पर, सदा शत्रु संहार करे।

चरामेति चरामेति का आव्हान करे निरंतर।
माँ भारती के सच्चे सपूत सीमा पर करते अरिमर्दन।।
२)
धरती अपनी अपना है गगन,
उन्मुक्त सदा हो जनजीवन।
सागर की गहराई मापे,
जल, थल, नभ में शत्रु कांँपे।
सिंह शावक सा घुस जाए,
शत्रु मध्य जब घिर जाए।
वार करे, जयघोष करे
अभिमन्यु सा रोष भरे।

हृदय स्पंदन नित निरंतर वंदेमातरम कहता है।
वीर सपूत सीमा पर जब , साँस एक एक भरता है।

साँसों की वीणा में देश की झंकार निरंतर।
माँ भारती के सच्चे सपूत सीमा पर करते अरिमर्दन।।

३)
माँ भारती के लाल तुम्हीं,
नंदलाल तुम्हीं, गोपाल तुम्हीं।
रक्षण करे जो वसुधा का,
वो वंदनीय अवतार तुम्हीं।
जननी के नित चरण प्रक्षालन
रुधिर स्वयं का करे अर्पण।
माता के आँचल रक्षा हित
निज जीवन का करे समर्पण।

जन्मभूमि को यज्ञ भूमि, तपभूमि  का संज्ञान दिया।
वीर सपूत ने भारत को, माता से बढ़कर मान दिया।
रणबाँकुरों की शौर्य गाथा, स्वर्ण अक्षरों में छपे निरंतर।
माँ भारती के सच्चे सपूत सीमा पर करते अरिमर्दन।।

४)
गंगा, यमुना सरयू की धार
भारत भूमि पवित्र अपार।
हीरा मोती रत्नों की खान,
वैदिक संस्कृति सबसे महान।
जना जिसने वो जननी धन्य,
भारत की ललना ना कोई अन्य।
निडरता का पयपान कराया
सीना तानकर चलना सिखाया।

रिश्ते नातों के बंधन से, अविचल जीवन बिताता है।
सच्चा साधक योगी तटस्थ, मातृभूमि से प्रेम बढा़ता है।

हे वीरपुत्र, हे रिपुदमन कोटि-कोटि नमन निरंतर।
माँ भारती के सच्चे सपूत सीमा पर करते अरिमर्दन।।
माँ भारती के सच्चे सपूत सीमा पर करते अरिमर्दन।।

    ।।जय हिंद।।

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