आप सभी के समीक्षार्थ प्रस्तुत है मेरा प्रयास 🙏(संशोधित रूप)
फ़िलबदीह क्रमांक 12
दूसरा चरण
रदीफ़- हो
क़ाफ़िया - आर
2212 2212 2212 2212
दुनिया के झूठे मंच पर, कोई असल किरदार हो
सच के लिए जो लड़ सके, वो आदमी तैयार हो।।1।।
जब औरतों की छुट्टी हो, घर पर रहें आराम से
हाथों मिले थाली भरी, कोई तो वो इतवार हो।।2।।
अपनों को छाया एक सी, दे प्यार पोषण एक सा
मुखिया वही होता सही, जो पेड़ सा छतनार हो।।3।।
वो रूठकर बैठे रहें, बातों से उनको लूँ मना
यूँ ज़िंदगी चलती रहे, कुछ रसभरी तकरार हो।।4।।
नदियों के जल में लोच हो, पर्वत का साफा हो हरा
आँचल घटा के बूँद हों, फसलों की बस चमकार हो।।5।।
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शर्मिला चौहान
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