मंगलवार, 20 फ़रवरी 2024

2212 2212 2212 2212 पर ग़ज़ल

आप सभी विज्ञजनों के समीक्षार्थ प्रस्तुत है मेरा प्रयास 🙏(संशोधित ग़ज़ल)

फ़िलबदीह क्रमांक -12
मिसरा-ए-तरह
आँखों से कीं बातें बहुत मुँह से कहा कुछ भी नहीं
क़ाफ़िया - ई की मात्रा
रदीफ़- नहीं

2212  2212  2212  2212


दुनिया की जिसने दौड़ में, इक जी-हजूरी की नहीं
उसको मिली मंज़िल मगर, राहें रहीं सीधी नहीं।।१।।

चलने का जज़्बा है अगर, दिन रात की फिर सोच क्या
 डर कर अँधेरे से कभी, देखो ज़मीं रूकती नहीं।।२।।

सीने पे खाकर गोलियां, जय भारती कहते रहे
अंतिम समय तक जोश था, आवाज़ थी धीमी नहीं।।३।।

ये प्रेम कितना है कठिन, बाती से जाकर पूछ लो
दीपक में भरने रौशनी, दम रहने तक बुझती नहीं।।४।।

छाने लगा उन्माद अब, ऋतुराज का है आगमन
बनठन खिली सरसों कहे, दुल्हन कहीं मुझ सी नहीं।।५।।

गिरह का शेर-

पिछली गली के मोड़ पर, यूँ मिल गए वो सामने
आँखों से कीं बातें बहुत, मुँह से कहा कुछ भी नहीं।।

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शर्मिला चौहान

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