मंगलवार, 13 फ़रवरी 2024

ग़ज़ल 1212 1122 1212 22

आप सभी विज्ञजनों के समीक्षार्थ प्रस्तुत है मेरा प्रयास 🙏

फ़िलबदीह क्रमांक 11
दूसरा चरण
रदीफ़- रहने दे
क़ाफिया- आन

1212  1122 1212  22

ज़रा कभी तो मुहब्बत की शान रहने दे
ये दिल तुझे ही दिया था गुमान रहने दे।।1।।

कभी बनाया था जो आशियाना ख़्वाबों का
तो मेरे दिल में वो खाली मकान रहने दे।।2।।

किए थे वादे कई और कसमें खाईं थीं
वो झूठे किस्से ही अब दरमियान रहने दे।।3।।

लिखे थे नाम तेरे सैकड़ों महकते ख़त
 दिलों की आशिकी का वो बयान रहने दे।।4।।

किनारे पर चले थे साथ साथ जब हम तुम
पड़े थे रेत में जो वो निशान रहने दे।।5।।

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शर्मिला चौहान

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