फ़िलबदीह क्रमांक _ 13
प्रथम चरण
क़ाफ़िया - ई की मात्रा
रदीफ़- थी मैं न थी
2122 2122 212
रात की दीवानगी थी मैं न थी
हर तरफ़ छाई खुशी थी मैं न थी।।१।।
गूँजती थी सब दिशाएं ढ़ोल से
मौज मस्ती हर गली थी मैं न थी।।२।।
प्रेम पाती ले भ्रमर फिरता रहा
प्रेम में डूबी कली थी मैं न थी।।३।।
गिर गए टेसू धरा की गोद में
प्रीत की चादर बिछी थी मैं न थी।।४।।
हट चुके थे बादलों के जाल जब
धूप नन्हीं तब खिली थी मैं न थी।। ५।।
गिरह का शेर-
आशिकों का कल यहाँ था रतजगा
मयकदा था चाँदनी थी मैं न थी।।६।।
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शर्मिला चौहान
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