गुरुवार, 7 मार्च 2024

2122 2122 212

फ़िलबदीह क्रमांक _ 13
प्रथम चरण
क़ाफ़िया - ई की मात्रा
रदीफ़- थी मैं न थी 

2122  2122  212 


रात की दीवानगी थी मैं न थी
हर तरफ़ छाई खुशी थी मैं न थी।।१।।

गूँजती थी सब दिशाएं ढ़ोल से
मौज मस्ती हर गली थी मैं न थी।।२।।

प्रेम पाती ले भ्रमर फिरता रहा
प्रेम में डूबी कली थी मैं न थी।।३।।

गिर गए टेसू धरा की गोद में
प्रीत की चादर बिछी थी मैं न थी।।४।।

हट चुके थे बादलों के जाल जब
धूप नन्हीं तब खिली थी मैं न थी।। ५।।


गिरह का शेर-

 आशिकों का कल यहाँ था रतजगा
मयकदा था चाँदनी थी मैं न थी।।६।।


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शर्मिला चौहान

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