होली पर विशेष ग़ज़ल
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आज चढ़ा है रंग नया इन मस्तानों की टोली में
भीग रहें हैं तन मन दोनों इस फागुन की होली में।।१।।
गलियाँ चौक मुहल्लों में ढ़ोल नगाड़े बजते ढम ढम
घर आँगन में फगुआ गूँजे देशज भाषा बोली में।।२।।
अम्माँ के हाथों की गुझियाँ थाली भर भर खत्म हुईं
भांग चढ़ा कर चाचा नाचे साड़ी बाँध ठिठोली में।।३।।
केसर घोल भरी पिचकारी कान्हा डालें सखियन पर,
प्रेम मगन ताकें सब सखियांँ भीगी लहंगा चोली में ।।४।।
भूल गए सब बैर बुराई लोग मिलें दिल खोल सभी
चुटकी भर रंग लगाकर प्रीत बढ़ाएं हमजोली में।।५।।
वृंदावन की कुंज गलिन में कान्हा रास रचाता है,
सुध बुध बिसरातीं सब सखियांँ उसकी सूरत भोली में।।६।।
सीमा पर तैनात सिपाही होली खूब मनाता है,
फाग सुनाई देता उसको सन सन चलती गोली में।।७।।
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शर्मिला चौहान
ठाणे (महाराष्ट्र)
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