गुरुवार, 21 मार्च 2024

2122 1122 22

फ़िलबदीह 14 
क़ाफ़िया -आ की मात्रा 
रदीफ़- हो जैसे

2122  1122  22

इश्क़ करना ही ख़ता हो जैसे
चाँदनी रात सज़ा हो जैसे।। 1।।

पेड़ झूमे हवा से हिल मिलकर
जाम दोनों ने पिया हो जैसे।।2।।

झाँकती यूँ है किरण फुनगी से
बीज धरती से उगा हो जैसे।।3।।

रात भर चाँद भटकता था यूँ
 चैन उसका खो गया हो जैसे।।4।।

डूब दरिया में गई थी कश्ती 
इश्क़ शिद्दत से किया हो जैसे।।5।।

गिरह का शेर-

सामने देख मुझे वह भागा
तार बिजली का छुआ हो जैसे।

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शर्मिला चौहान

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