फ़िलबदीह 14
क़ाफ़िया -आ की मात्रा
रदीफ़- हो जैसे
2122 1122 22
इश्क़ करना ही ख़ता हो जैसे
चाँदनी रात सज़ा हो जैसे।। 1।।
पेड़ झूमे हवा से हिल मिलकर
जाम दोनों ने पिया हो जैसे।।2।।
झाँकती यूँ है किरण फुनगी से
बीज धरती से उगा हो जैसे।।3।।
रात भर चाँद भटकता था यूँ
चैन उसका खो गया हो जैसे।।4।।
डूब दरिया में गई थी कश्ती
इश्क़ शिद्दत से किया हो जैसे।।5।।
गिरह का शेर-
सामने देख मुझे वह भागा
तार बिजली का छुआ हो जैसे।
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शर्मिला चौहान
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