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माँ भारती का रक्षक, है सच्चा लाल सैनिक
सीमा पे है खड़ा जो, बनकर के ढाल सैनिक।।1।
है झुंड़ शत्रुओं का, हँसता बढ़े वो आगे
चलता है मस्त देखो, हाथी की चाल सैनिक।।2।।
आराम और छुट्टी, उसके लिए नहीं कुछ
सीमा पे रहता चौकस, है सालों-साल सैनिक।।3।।
त्यौहार पर्व बचपन, उसकी बड़ी धरोहर
अपनों की बातें करके, होता निहाल सैनिक।।4।।
सांझी खुशी के अवसर, बढ़-चढ़ के है मनाता
दुख अपना साझा करना, जाता है टाल सैनिक।।5।।
रणबांकुरा निडर वो, इंसान सीधा सच्चा
महसूस करता दिल से, लोगों का हाल सैनिक।।6।।
चरणों में भारती के, जीवन किया है अर्पण
झुकने कभी न देगा, माता का भाल सैनिक।।7।।
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शर्मिला चौहान
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