खूबसूरत ग़ज़लों से सजे इस पटल पर आ.अनिल सर एवं सभी साथियों के समीक्षार्थ प्रस्तुत है मेरा प्रयास।🙏(संशोधित)
फ़िलबदीह 53
दूसरा चरण
2122 2122 212
ये मनुज जीवन बड़ा उपहार है
फिर भी मानवता से क्यूँ इंकार है।।1।।
कौन कब बदलेगा नीयत क्या पता
किस समय पर किसको क्या दरकार है।।2।।
घूमता पहने मुखौटा आदमी
हर मुखौटे का अलग किरदार है।।3।।
युद्ध चलते रात दिन उठता धुआँ
विश्व में हर ओर हाहाकार है।।4।।
धीर वसुधा का भी अब तो छूटता
मौन कब तक वो करे मनुहार है।।5।।
खुद मिटा आपस की फैली दूरियां
प्रेम ही सबसे बड़ा हथियार है।।6।।
भूल मत जन्मा है तू जिस देश में
कृष्ण राधा का यहां अवतार है।।7।।
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शर्मिला चौहान
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