सोमवार, 10 नवंबर 2025

2122 2122 212 पर ग़ज़ल

खूबसूरत ग़ज़लों से सजे इस पटल पर आ.अनिल सर एवं सभी साथियों के समीक्षार्थ प्रस्तुत है मेरा प्रयास।🙏(संशोधित)


फ़िलबदीह  53
दूसरा चरण 
2122  2122  212

ये मनुज जीवन बड़ा उपहार है 
फिर भी मानवता से क्यूँ इंकार है।।1।।

कौन कब बदलेगा नीयत क्या पता
किस समय पर किसको क्या दरकार है।।2।।


घूमता पहने मुखौटा आदमी
हर मुखौटे का अलग किरदार है।।3।।


युद्ध चलते रात दिन उठता धुआँ
विश्व में हर ओर हाहाकार है।।4।।


धीर वसुधा का भी अब तो छूटता
मौन कब तक वो करे मनुहार है।।5।।


खुद मिटा आपस की फैली दूरियां 
प्रेम ही सबसे बड़ा हथियार है।।6।।


भूल मत जन्मा है तू जिस देश में 
कृष्ण राधा का यहां अवतार है।।7।।


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शर्मिला चौहान

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