"शिव वंदना"
हे नीलकंठ, हे शिव शंकर, मम हृदय करो बसेरा।
हे उमापति, हे महादेव, कैलाश बने मन मेरा।।
मन कर्म वचन का बिल्वपत्र, नित्य करूँ शिव अर्पण,
नंदी जैसा मौन साथ, रहे मन में पूर्ण समर्पण।
जटाजूट का वेश धराए, तप करते महायोगी,
तामस छोड़ सत्व को पाऊँ, जनम जनम की भोगी।
हे शिव शंभू, हे मृत्युंजय, दूर करो तम मेरा।
हे उमापति, हे महादेव, कैलाश बने मन मेरा।।
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घट घट वासी, शिव अविनाशी, भूत भविष्य के ज्ञाता,
ज्ञान चक्षु खुल जाएं भोले, हूँ मूढ़ मति अज्ञाता।
सत रज तम से ऊपर हैं, निर्गुण त्रिशूल धारी,
भूत भविष्य के ज्ञाता हैं शिव, रूप छबि निराली।
हे त्रिलोकी, हे गंगाधर, अज्ञान हरो प्रभु मेरा।
हे उमापति, हे महादेव, कैलाश बने मन मेरा।।
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नाग ततैया बिच्छू विषधर, सबको गले लगाए,
हलाहल धारे सृष्टि हित, नीलकंठ कहलाए।
बाघंबर मृगछाला पहनें, करते नंदी सवारी,
पशुपति हो नाथ सदा ही, अद्भुत लीला तिहारी।
हे शंकर, हे भूतपति, करुँ सदा जप तेरा।
हे उमापति, हे महादेव, कैलाश बने मन मेरा।।
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हे सोमनाथ, हे महाकाल, कल्याण कारी विश्वेश्वर,
हे शिव शंकर, हे मृत्युंजय, केदारनाथ रामेश्वर।
हे वामदेव, अंबिकानाथ, हे त्रिलोकेश जटाधर,
हे त्र्यंबकं, हे बैद्यनाथ, कैलाशपति परमेश्वर।
त्रिदल त्रिशूल त्रिपुंड धारी, हो त्रिलोक के स्वामी,
भक्ति शक्ति मुक्ति के दाता, भोले अंतर्यामी।
हे आदिदेव, हे शिव शंभू, रक्षण करना मेरा।
हे उमापति, हे महादेव, कैलाश बने मन मेरा।।
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🙏ऊँ नमः शिवाय 🙏
शर्मिला चौहान
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