शुक्रवार, 19 जुलाई 2024

लघुकथाएं, मेरी दृष्टि से (अहमदनगर)

"लघुकथाएं: मेरी दृष्टि से"


कहानियों से जब लघुकथा के संसार में पदार्पण किया तो कुछ बंधन, वर्जनाएं सीखने का अवसर मिला।‌ सूक्ष्म निरीक्षण, शब्दों का पैनापन, समाज के प्रति अपना दृष्टिकोण और सही सोच के साथ लघुकथाएं लिखी जातीं हैं।‌ 
नाम के अनुसार,आकार में लघु परंतु अपनी बात पूर्णतया कहने में सक्षम होतीं हैं लघुकथाएं। लघुकथाकार संवेदनाओं की भूमि पर विसंगतियों के बीज बोकर, शब्दों-भावों का सिंचन करके, लघुकथा का पौधा तैयार करता है। इस प्रक्रिया में, तैयार होती लघुकथा आने वाली समस्याओं से जूझकर, अपना अस्तित्व बनाए रखना भी सिखाती है।

परिवार, समाज, देश और अब तो विश्व स्तर के विभिन्न विषयों पर, लघुकथाकार अपनी कलम चला रहें हैं। पाठकों के द्वारा पढ़ी‌ जाने वाली प्रमुख विधाओं में, लघुकथा ने अपना स्थान बनाया है।
वर्तमान की विषमताओं, परिस्थितियों पर नज़र बनाए रखने वाली, सशक्त विधा है लघुकथा।‌
आसपास की भौगोलिक स्थिति, सामाजिक व्यवस्था, औद्योगिक विकास संबंधी लघुकथाएं, जहाँ समस्याओं को जनमानस तक लातीं हैं, वहीं उनके समाधान का कुछ प्रयास भी करतीं हैं।  

लघुकथाकार की सूक्ष्म दृष्टि, उसकी सहृदयता उसे एक सशक्त लघुकथा लिखने को प्रेरित करती है। लघुकथाओं के पात्र इसी समाज से चुने और फिर बुने जाते हैं।‌ विषयों को चुनना बेहद महत्वपूर्ण चुनौती भरा काम है क्योंकि इसी पर लघुकथा का दारोमदार निर्भर करता है।

नदी के सूखकर, प्रवाह का मंद होना, एक पर्यावरण जनित समस्या है जिसके साथ समाज के बँटवारे को जोड़ने के प्रयास में लिखी मेरी एक लघुकथा "बैलेंसिंग" की कुछ पंक्तियां, जो भाषा के प्रवाह से लघुकथा को अंत तक ले जाती है।
"किनारों की ऊँचाई तक लहरों के अंगड़ाइयों के निशान बना करते थे, रामदीन ने महसूस किया की अब नदी की साँसें फूल जातीं हैं। उसकी तलहटी के रंग-बिरंगे, हीरे-जवाहरात से चमकते पत्थर, अब मटमैले धूसर हो गए हैं। वह भी कृशकाय हो गई है बिल्कुल रामदीन की तरह।"

मेरी लघुकथाएं मुख्यतः स्त्री विमर्श, उनके प्रतिरोध, बाल विसंगतियों, पर्यावरण एवं संवेदनाओं से भरपूर समाज से जुड़ी, आशावादी दृष्टिकोण लिए, विभिन्न समस्याओं के समाधान हेतु अग्रसर रहतीं हैं।

 लघुकथा "शक्ति" जिसे पाठकों द्वारा, निर्णायकों द्वारा बहुत सराहा गया, वह झोपड़पट्टी में रहने वाली छोटी बच्ची पर लिखी है। माता-पिता रोजी-मजदूरी के लिए जाते हैं और बच्चे थोड़ा बहुत पढ़कर, उसी काम में लग जाते हैं। एक मूर्तिकार का, छोटी बच्ची को पुस्तक-स्लेट देकर, देवी की मूर्ति के श्रृंगार को पूर्ण करना, बालिकाओं की शिक्षा पर बल देता है।

इसी प्रकार "चिंगारी" "गौरैया-बाज" "न्याय" "स्वयं सिद्धा" जैसी लघुकथाएं, स्त्रियों को अपने ऊपर होने वाले अत्याचार के प्रति आवाज़ उठाने पर आधारित हैं। प्रतिरोध, रोष दिखाएं बिना ग़लत करने वालों को मुँहतोड़ जवाब संभव नहीं है।

"भूख"  "धर्म" "बदलता ज़ायका" "विनिमय" "बहती संवेदना" जैसी लघुकथाएं, समाज का आधार प्रेम, अपनापन और दया जैसी संवेदनाओं को बनातीं हैं।

"कठपुतली" "गिरगिट" "काले उजाले" "नई फ्रॉक" लघुकथाएं, बाल विसंगतियों को सामने लातीं हैं जो आज के समाज पर प्रश्न चिन्ह हैं।

नए विषय, नए विचारों से भरपूर "अटैक" "हकीकत"  "किराएदार" "संरक्षक" "कंपनी" जैसी लघुकथाएं, वर्तमान एवं भविष्य में आने वाली बड़ी समस्याओं की ओर ध्यान आकर्षित करतीं हैं।
"कंपनी" में घर के वृद्ध को अचंभा होता है कि तीसरी पीढ़ी के बेटे बहू अपने शुक्राणु और अंडाणु अपनी कंपनी के बैंक में सुरक्षित रख दिए हैं ताकि भविष्य में जब समय मिले, अपना परिवार बढ़ाएंगे।

लघुकथाओं का अनंत विस्तार है जिनमें विचरण करते हुए, लघुकथाकार स्वयं को उसी का एक किरदार अनुभूत करने लगता है। यही अनुभूति ही लघुकथा का मूल आधार है।
अहमदनगर (महाराष्ट्र) लघुकथा शोध केंद्र से जुड़ना, मेरा सौभाग्य है। आदरणीया ऋचा शर्मा जी के‌ नेतृत्व में लघुकथाओं के विस्तार, विकास पर मार्गदर्शन मिलता है। मासिक संगोष्ठी, लघुकथाओं के वाचन और उनपर वरिष्ठ लघुकथाकारों के सुझाव जैसे नियमित आयोजनों से, बहुत कुछ सीखने मिलता है। आचार्य जगदीश चंद्र मिश्र वार्षिक लघुकथा प्रतियोगिता के आयोजन संयोजन से, लघुकथाकारों की गुणवत्ता को परखने का स्वस्थ अवसर मिला है।

अखिल भारतीय लघुकथा प्रतियोगिता 2020 में मेरी लघुकथा "सौंधी महक" का प्रथम स्थान प्राप्त करना, मेरा रूझान लघुकथाओं की ओर बढ़ाने का गौरवपूर्ण कारण था। 
विभिन्न साहित्यिक मंचों, संस्थानों द्वारा आयोजित लघुकथा प्रतियोगिताओं में, मेरी लघुकथाएं पुरस्कृत होतीं रहीं एवं पाठकों द्वारा सराही गईं।

साहित्यिक पत्र-पत्रिकाओं, संकलनों में प्रकाशन के अलावा क्षितिज लघुकथा प्रतियोगिता, सिरसा हरियाणा लघुकथा प्रतियोगिता, आचार्य जगदीश चंद्र मिश्र लघुकथा प्रतियोगिता, कृष्णा देवी सारस्वत लघुकथा प्रतियोगिताओं में पुरस्कार एवं सम्मान प्राप्त मेरी लघुकथाएं, मेरी संवेदनाओं की कलम  से निकलीं हैं। लघुकथाएं के इस सुंदर संसार को अपनों लेखनी से सुंदरतम बनाने का निरंतर प्रयास करतीं रहूंगी।


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नाम - शर्मिला चौहान 
शिक्षा - एम.एच.एससी., बी.एड.
प्रकाशित कहानी संग्रह - मुट्ठी भर क्षितिज 

लघुकथा संग्रह के प्रकाशन की प्रक्रिया में अग्रसर।

निवास - ठाणे (महाराष्ट्र)

9967674585
ई-मेल- sharmilachouhan.27@gmail.com 

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