औरतों पर आज एक ग़ज़ल कही है।🙏
द्रौपदी को खुद अपनी लाज अब बचानी है
कृष्ण जी के आने की बात तो पुरानी है।।1।।
मूक बैठ कर देखें चीर के हरण को जो
अब दिखे न वो मंज़र याद फिर दिलानी है।।2।।
औरतें रहीं दुश्मन औरतों की सदियों से
लोक लाज के बंधन दर्द की कहानी है।।3।।
धुंध थी दिशाओं में भेद की प्रथाओं में
गाँठ जो पड़ी अंतस अब वही छुड़ानी है।।4।।
सोच तंग दुनिया की वंशबेल बेटों से
कम नहीं ये बेटियांँ भी बात यह बतानी है।।5।।
बाग की सभी कलियांँ हृष्ट पुष्ट हों उन्नत
ज्ञान पुष्प विकसित हों वो फसल उगानी है।।6।।
मुश्किलों को झेलती विघ्न हर को ठेलती
छू रही गगन सारा जीत की निशानी है।।7।।
शर्मिला चौहान
ठाणे (महाराष्ट्र)
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