फ़िलबदीह क्रमांक -21
प्रथम चरण
मिसरा-ए-तरह
थान अंगूठी से निकले
इतनी कात मुहब्बत को(हस्तीमल जी हस्ती)
वज़्न
22 22 22 2
अपने दिल की सुनते जो कभी न फिर पछताते वो।1।
मीठे फल की आस बसी
अच्छे बीज अभी से बो।2।
चाँद रहे घटता बढ़ता
कपड़ा फिट भी कैसे हो।3।
दाग़ दिखाता औरों के
पहले खुद का चेहरा धो।4।
प्रभु की दुनिया है सुंदर
सुंदरतम ही रहने दो ।5।
तरही मिसरा-
रेशम सा दिल खिल जाए
इतनी कात मुहब्बत को।
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शर्मिला चौहान
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