आदरणीय अनिल सर एवं आप सभी मित्रों के समीक्षार्थ प्रस्तुत है मेरा प्रयास 🙏( संशोधित रुप)
फ़िलबदीह क्रमांक 22
दूसरा चरण
क़ाफ़िया -ई की मात्रा
212 1222 212 1222
सींच दे दिलों को जो, वो नमी कहीं गुम है
गूँज जाये घर जिससे, वो हँसी कहीं गुम है।।1।।
चार दाने चुगकर जो, मीठे गीत गाती थी
दौर में नये देखो, वो चिड़ी कहीं गुम है।।2।।
लिखते थे कभी जिसमें, सब हिसाब खुशियों के
आज के ज़माने में, वो बही कहीं गुम है।।3।।
थामकर जिसे शिक्षक पाठ को पढ़ाते थे,
आज उनके हाथों की, वो छड़ी कहीं गुम है।।4।।
तेज़ चाल से अपनी, जो मुझे डराती थी
सुस्त सी पड़ी रहकर, वो घड़ी कहीं गुम है।।5।।
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शर्मिला चौहान
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