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फ़िलबदीह क्रमांक-10
दूसरा चरण
क़ाफिया- आया
रदीफ़- था कभी
धुन पे मुरली की कन्हैया ने नचाया था कभी
गोपियों को प्रेम का अमृत पिलाया था कभी।।1।।
भूलकर गोकुल की गलियाँ श्याम तू तो खो गया
याद कर लेना यहीं तो दिल लगाया था कभी।।2।।
मौन यमुना मौन पंछी कुंज गलियां मौन हैं
गीत तेरे साथ कान्हा सबने गाया था कभी।।3।।
जल में यमुना के स्वयं को ढूँढती है कनुप्रिया
मुस्कुराता वो जिसे दिल में छिपाया था कभी।।4।।
प्रेम सागर पैठ कर उसने ही मोती पाया है
जिसने निश्छल प्रेम-नौका को तिराया था कभी।।5।।
शर्मिला चौहान
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