सोमवार, 15 जनवरी 2024

212 212 212 212 पर ग़ज़ल

आदरणीय अनिल सर के मार्गदर्शन से संशोधित ग़ज़ल 🙏

फ़िलबदीह क्रमांक - 9
क़ाफिया- आया
रदीफ़- नहीं


मन भटकता रहा ठौर पाया नहीं
 झूठ का दौर था जो कि भाया नहीं।।1।।

सूर्य किरणें थकीं खोज कर आसरा
शुष्क होती धरा पास छाया नहीं।।2।।

ओस चंचल हुई फुनगियों पर मटक
दिन का चढ़ना उसे रास आया नहीं।।3।।

तोड़कर पिंजरा कब पखेरू उड़ा
बात इतनी समझ कोई पाया नहीं।।4।।

राम सबके लिए प्रेरणा पुंज हैं 
गुण भजन राम का किसने गाया नहीं।।5।।


शर्मिला चौहान

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