[23/11, 19:14] Sharmila Chouhan: कुंडलियां
पानी रहता सरल मन, घुले मिले सब संग।
साथ मिलता जब जिसके, ले लेता वह रंग।।
ले लेता वह रंग, गुण यही बड़ा निराला।
सब कुछ करता दान, बने बादल मतवाला।।
कीमत है अनमोल, बात जिसने यह जानी।
बचत करें सब लोग, धरा का धन है पानी ।।
[23/11, 22:18] Sharmila Chouhan: कुंडलियां
थाना सुंदर है नगर, बड़े ताल हैं शान।
चली रेलगाड़ी प्रथम, यह इसकी पहचान।।
यह इसकी पहचान, बहुत से समुद्री बंदर।
घोड़ों का व्यापार, दूर देशों के अंदर।।
वीर मराठा शान, इस नगरी में आना।
चटपटी मिसल पाव, सदा याद रहे थाना।।
शर्मिला चौहान
[25/11, 16:25] Sharmila Chouhan: कुंडलियां
लगाना पौधा तुलसी, जगविदित यही नाम।
रोगों से रक्षा करना, सुंदर इसका काम।।
सुंदर इसका काम, हरिप्रिया यह कहलाती।
विष्णु को दिया शाप, घरों में पूजी जाती।।
पवित्र कार्तिक मास, मंगल ब्याह रचाना।
अपने घर के द्वार, बिरवा तुलसी लगाना।।
शर्मिला चौहान
कुंडलियां
बेटा बेटी एक सम, कभी करें ना भेद।
अंतर इनमें जो करें, रहे हृदय में खेद।।
रहे हृदय में खेद, बेटियां बड़ी अनूठी।
मन में इनके प्यार, दिखें ऊपर से रूठी।।
भरें नेह भंडार, बनें खुशियों की पेटी।
सुखी वही परिवार, जहाँ सम बेटा बेटी।।
शर्मिला चौहान