मंगलवार, 22 दिसंबर 2020

चोका

[21/12, 11:46] Sharmila Chouhan: चोका

खुला वितान
हौसला पंख लगे
आशा संजोए
अग्रसर उड़ान
संबल बनें
धैर्य सोच सकार
तजें नकार
मन खड़ा दोराहा
चयन करें
साकार स्वप्न होंगे
आती मुश्किलें
टकरा कर लौटें
लौह इरादे
निज पर विश्वास
पूरी हो हर आस

शर्मिला चौहान
[22/12, 15:45] Sharmila Chouhan: चोका

चंद बूंदों से
बन जाता जीवन
वात्सल्य पूर्ति
करे माँ और माटी
आँचल ढँके
पोषण नवजात
जग देखते
अंकुर और शिशु
प्रकृति जन्य
पौधा झेले आपदा
होता सुदृढ़
नाजुक बने बाल
सुविधा तले
पुष्ट बने जीवन
हो संगोपन
हरा वृक्ष मुस्काय
करे सहाय
परहित जो करे
मानव कहलाय

शर्मिला चौहान

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