221 2121 1221 212
गठरी को बांधे जाने को तैयार साल है
इसको जो रोक ले कहो किसकी मजाल है।।1।।
अब बीत जाना उसको है ये जानता है वो
जाते हुए भी पर वो मचाता धमाल है।।2।।
अल्हड़ सी चाल चलते नया साल आ गया
हैरान वो कि सामने तो भूतकाल है।।3।।
इक पल को हाथ थामे खड़े साथ साथ वो
इस पल में दोनों बीच नहीं अंतराल है।।4।।
जाता जो साल देता नसीहत नवीन को
अपने पे दंभ मत करो सब मोहजाल है।।5।।
जो आज है वो सामने बीता तो कल हुआ
ये सत्य जान ले वही दर्शी त्रिकाल है।।6।।
यादों की मुट्ठी बांध नए साल में जिएं
हर साल अपने आप में बस बेमिसाल है।।7।।
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शर्मिला चौहान
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