रविवार, 7 दिसंबर 2025

221 1222 /221 1222


221 1222/ 221 1222


हो ज्ञान विषय का कम, तो वाद नहीं करते 
औरों का समय यूँ हम, बर्बाद नहीं करते।।1।।

हर साग अनोखा है, गुण रूप विविध सबके
भर खूब मसालों से, बेस्वाद नहीं करते।।2।।

निज देश बचाने को, जो प्राण लुटा देते
क्यों लोग उन्हें दिल से, नित याद नहीं करते।।3।

आपस में समझ कम हो, संबंध भी बिगड़ें पर
परिवार बचाने को, संवाद नहीं करते।।4।।

अच्छी हो ग़ज़ल जो भी, हिंदी में कि उर्दू में
भाषा की बहस उस पे, उस्ताद नहीं करते।।5।।

गिरह का शेर-

मुश्किल में अगर हम हों, अपने भी पराये भी
अफ़सोस तो करते हैं, इम्दाद नहीं करते।।


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शर्मिला चौहान

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