व्यंग्य -"बिगड़ी बात बने नहीं, लाख करो किन कोय
(रहिमन फाटे दूध को, मथे ना माखन होय)
"घंटे भर से बाथरूम में कैद होकर लाख टाइमपास कर लो, बात बनेगी नहीं।" कोकिला की कर्कश आवाज़ से मधुर के गाने की तन्मयता भंग हो गई।
"अब बाथरूम के समय का भी हिसाब देना पड़ेगा क्या तुम्हें?" चिढ़कर मधुर तुरंत टॉवेल लपेटता बाहर आ गया।
विजयी मुस्कान लिए कोकिला किचन में गई और मधुर तैयार होने लगा।
सामने आइने में अपना कच्चा-चिट्ठा देख, अपने अस्तित्व को एक क्षण के लिए नकार दिया उसने।
सिर पर चमकते चाँद की झलक, अपना पैर पसारे दूर तक पेट का फैलाव, शुभ्र बालों का जनसंख्या की तरह तेजी से विस्तार, सचमुच मधुर अपने इस बदलाव पर हैरान खड़ा रह गया।
"आज से अपना लंच बॉक्स मत देना, हज़ार बार कहा कि दो रोटी ही दिया करो परंतु नहीं, तीन तीन पराठे और डिब्बे की सांस फूलते तक सब्जी़ ठू़ंँसती हो।" अपने शरीर के फैलाव का सारा दोष मधुर ने कोकिला के माथे पहना दिया।
ऐसे ताज पहनना तो क्या, कोकिला को अपने सिर पर एक क्षण भी ना रखना गंवारा
नहीं था।
अपनी आँखों की पुतलियों को, पलकों से बाहर ढकेलती हुई, कमर में चुन्नी लपेटे, हाथों में बेलन लिए वो किचन से बेडरूम में आ धमकी।
"फलाने चोपड़ा के टिफिन के आलू पराठों की क्या खुशबू आती है, ढिकानी मिताली मैडम के अंडे बिरयानी तो किसी फाइव स्टार से लाए लगते हैं वाह!" ज़रा सांस लेकर बोली, "घर की रोटी-सब्जी नहीं बल्कि मक्खन लगे आलू पंराठे और शुद्ध घी की अंडा बिरयानी लटक रही है शर्ट से बाहर।" अपनी सारी आहुति हवन में डाल, प्रज्ज्वलित अग्नि को बिना देखे ही वह वापस चली गई।
"शाम को सिर्फ सलाद और सूप ही पियूंँगा।" दृढ़ संकल्प मधुर की आवाज़ में झलक रहा था।
सामने खड़ी स्त्री ने, एक सौ अस्सी अंश पर सिर दांए से बाएं हिलाया और गाने लगी, "हमको मन की शक्ति देना...!"
डाइनिंग टेबल पर रखे बिस्किट, नमकीन, वैफर्स के पैकेटों को जाते जाते मधुर ने, बाजू की आलमारी के निचले खंड में फेंक दिया और सौ ग्राम वजन कम हो जाने का अहसास लिए ऑफिस निकल गया।
फोन पर सारे सोशल मीडिया, विज्ञापन छानकर पाँच जिमों में फोन घुमाया।
"कमाल है, जिम जैसी मेहनत वाली जगहों पर कोमल मीठी वाणी से फोन उठाने वाली रिसेप्शनिस्ट रखी जातीं हैं।" मधुर के मन में जिम के प्रति उत्साह बढ़ गया।
लंच टाइम होते होते, पेट ने आसपास से अपनी शिकायत शुरू कर दी। कुलबुलाहट ही आवाज़, चोपड़ा के डिब्बे की महक से कुछ ज़्यादा ही बढ़ गई।
परेशान होकर मधुर बाहर निकलने लगा कि दोस्तों ने पूछा, "आओ यार, आज टिफिन नहीं लाए क्या? आ जाओ सबके साथ खा लो।"
डिब्बों की सब्जियांँ, मसाले, अचार, चटनी की खुशबू से मधुर की जीभ लार के तालाब में तैर रही थी।
अपने दिल दिमाग के घोड़ों पर लगाम कसकर मधुर ने अति मधुर स्वर में अपनी डाइटिंग, फिटनेस का संकल्प बताया। सिर हिलाते हुए दोस्तों की आँखों में झलकता अविश्वास, मधुर को घायल कर गया।
बाहर भी लंच टाइम का माहौल था। रेस्टोरेंट और आसपास के ठेलों पर लोगों की भीड़ लगी हुई थी। नारियल पानी खरीदकर पीने ही वाला था कि गड़गड़ाते पेट ने फिर गुहार लगाई।
ठेले से एक वड़ा पाव लेकर, इधर-उधर देखते हुए मुँह में ठूँस लिया उसने। अब तो उदराग्नि भड़क गई थी, पेट और आहुति मांँग रहा था। दूसरा वड़ा पाव अंदर समर्पित कर, आराम से कुर्सी पर बैठकर सिप सिप नारियल पानी पीने लगा।
आत्मिक संतुष्टि की चरम सीमा थी। कैसी दुनिया है ऊपरी दिखावा जानती है, अंदर सभी का मन एक ही है। इस शरीर से बड़ी आत्मा है हर एक प्राणी में समान है।
अपने आपको आध्यात्मिक लहरों के बीच पाया मधुर ने।
ऑफिस के सैकंड हॉफ में, सारे जरूरी काम दिल लगाकर खत्म किए मधुर ने।
जिम क्या था, काँच का बना सुंदर शो-केस जिसमें बड़े बड़े यंत्र-तंत्र सजे थे। कोई अभिमन्यु सा वजन उठाए ललकार रहा था तो कोई मशीन पर दौड़ते दौड़ते अपना पसीना बहा रहा था, कोई गोल बड़ी सी गेंद पर लोट लोट कर घूम रहा था।
"आपको आपकी बॉडी के एकार्डिंग फिटनेस प्लान दिए जाएंगे। पर्सनल ट्रेनर रहेगा, डाइटीशियन के साथ आपकी हर सप्ताह बात होगी। सप्ताह भर का खान-पान गाइडेंस किया जाएगा।" मधुर की कल्पना सेभी ज़्यादा खूबसूरत रिसेप्शनिस्ट सामने खड़ी थी। मधुर ने अनुमान लगाना शुरू किया कि इसकी आवाज़ ज़्यादा अच्छी है या ये खुद।
"इधर आओ, आपका मैज़रमेंट लेना है।" कानों में गरम शीशे की तरह उतरने वाली आवाज़ थी।
कंधों पर रखा उसके हाथ के वजन को मन ही मन आंकता मधुर पीछे मुड़ा। करीब सवा छह फीट ऊँचा, काला, टकला,गठीले बदन का पहलवान नुमा आदमी सामने खड़ा था।
"मुझे कोई कपड़ा-वपड़ा नहीं सिलाना भाई।" मधुर ने उसका हाथ कंधे से हटाने की असफल कोशिश की।
अंगद के पैरों का तो सुना था, उसके हाथों के बारे में कोई जानकारी नहीं थी उसे।
"आपके फिटनेस फीस के लिए ही माप रहा हूँ।" कहते हुए उसने मधुर के कंधों पर बैताल की तरह चिपके बैग को निकाल कर, बाजू की मशीन पर लटका दिया।
छाती, पेट, भुजाओं, हिप्स सभी को बारी बारी मापकर उसने अपनी कॉपी में लिख लिया। बड़े ही रहस्यमय अंदाज़ से मुस्कुराते हुए उसने रेट कार्ड समीर को पकड़ा दिया।
लाल रंग का, बहुत खूबसूरत कार्ड देख समीर पढ़ने लगा।
चैस्ट बढ़ाना:
प्रति इंच मूल्य
पेट कम करना :
प्रति इंच मूल्य
मसल्स मजबूत करना:
बाइसेप्स मूल्य
(जी.एस.टी., डाइटीशियन फीस, स्पेशल ट्रेनर फीस अलग)
"जब ज्वाइन करोगे तो डाइटीशियन के प्लान के हिसाब से खाना पीना। हर सप्ताह का मील प्लान करतें हैं यहाँ।" कड़क, टका सा जवाब देकर टकला चला गया।
मधुर अपने एक्स्ट्रा इंचेस को मन ही मन गिनना चाह रहा था परंतु ये ऑफिस का हिसाब किताब थोड़े ही था जो राव सर के सिर मढ़ कर हाथ झाड़ लिया जाए।
"आइए सर, आपको अपना ऑफिस दिखातीं हूँ।" उस खूबसूरत लड़की की आवाज़ ने कानों में पुनः मिसरी घोल दी।
मंत्रमुग्ध उसके पीछे-पीछे समीर कब काँच के बने, एयरकंडीशंड ऑफिस में आकर, कुर्सी पर बैठ गया, पता ही नहीं चला।
"आप बिल्कुल फ़िक्र ना करें सर, एक बार हमको ज्वाइन कर लिया तो इस ऑफिस में आपकी भी ऐसी ही डेशिंग फोटो लगेगी।" एक दिलकश अदा से वह उसे चारों तरफ लगी तस्वीरों का परिचय बताने लगी।
उसके अंदाज़ से मधुर को विश्वास हो गया कि दीवारों पर लटकते इन सुंदर, सजीले, आकर्षक नवजवानों का वज़न उससे उन्नीस बीस ही रहा होगा और वह उनके बीच में अपनी फिट फोटो को फिट करने की कोशिश करने लगा।
"मुझ जैसी चार पर्सनल ट्रेनर हैं, आपकी चॉइस से आपको प्रोवाइड की जाएंगी। स्पेशल ट्रीटमेंट से बहुत जल्दी आप एकदम परफेक्ट मॉडल बन जाएंगे।बस, इसके लिए थोड़ा एक्स्ट्रा चार्ज रहेगा जो आप दे ही देंगे।" इतना अधिकार और विश्वास तो किसी ने उस पर नहीं किया था, उसने खुद ने भी नहीं।
खुशी से हलका हो, कल्पना के पंख लगाए वह आसमान में अपने आपको ढूंँढने चला।
रोज़ इस खूबसूरत साथी के साथ रिलेक्सिंग समय, हल्की-फुल्की एक्सरसाइज, नपा तुला बढ़िया सा खाना और फिर दुनिया के इस मंच पर एक चमकते सितारे "मधुर" का जन्म होगा। अभी मन के घोड़ों को बेलगाम छोड़ दिया था उसने।
"आइए सर, कुछ फार्म पढ़कर आप साइन कर दीजिए। तब तक मैं आपके लिए चाय भिजवाती हूँ।" ऑफिस में कुछ कागज़ों के साथ उसे छोड़कर, वह बाहर चली गई।
उस फॉर्म को पढ़ता हुआ, नियमों को समझता हुआ जब मधुर, मासिक फीस के कॉलम में आया तो एयरकंडीशन कमरे में भी चेहरे पर कुछ बूँदों के सरकने का अहसास हो गया
उसके शरीर के बढ़े हुए इंचेस ने इस कागज़ की गर्मी बढ़ा दी थी। बारह हज़ार महीने का जिम, स्पेशल ट्रेनर। बाद में प्रोटीन, खाने-पीने का अलग।
आज उसे अपने बढ़े हुए शरीर पर गुस्सा आ रहा था। अरे, अब आदमी हवा पीकर तो नहीं जी सकता ना, दो टाइम खाने पर सुरसा के मुँह की तरह फैल गया।
बड़ी ब्रांड के कप प्लेट में दी हुई हैल्दी ग्रीन टी, मधुर को कसैली और बेस्वाद लगने लगी। सारे कागज़ बैग में भर, उस लड़की से कल आने का वादा कर मधुर तेज़ी से बाहर निकल गया।
बाइक को चार-पांँच बार आदेश दिया पर वो टस से मस नहीं हुई। अपनी सर्विसिंग के लिए उसका भी मुँह फूला था।
मधुर ने अनुनय विनय किया और सर्विसिंग के आश्वासन का पेट्रोल पाते ही वह स्टार्ट हो गई। आश्वासन के पेट्रोल से तो देश की गाड़ी भी चलती रहती है फिर इस बाइक की क्या बात।
अपने घर से आती सौंधी खुशबू से मधुर विचलित हो गया।
"हाथ मुँह धोकर आ जाओ, आज तुम्हारी पसंद का खाना बनाया है।" सुबह की आवाज़ और अभी की मिठास से किसी अप्रत्याशित की कल्पना कर ली थी मधुर ने।
"तुमको कहा था ना कि शाम को सिर्फ सलाद और सूप लूँगा। मुझे अपने संकल्प से कोई नहीं हटा सकता।" मधुर ने आवाज़ तेज़ की।
"आज तो हमारे पापा का बर्थडे है इसलिए सब बनाए हैं। मम्मी पापा, भैया भाभी मंदिर दर्शन के लिए गए थे तो आज रात यहाँ रुकते हुए जाएंगे।" कहते हुए कोकिला ने मधुर के हाथ का बैग लेकर अंदर रख दिया।
"पूरी की पूरी दाल ही काली है आज तो।" हाथ पैर धोते हुए मधुर अपनी सास की तीक्ष्ण दृष्टि को शरीर में घुसता महसूस कर रहा था।
"जो खाए सो खाए, मेरे लिए तो सलाद काट दो बस।" आज मधुर भी अपने संकल्प से हटने को राज़ी नहीं था।
गिलास भर पानी से आई डकारों ने लंच का राज खोलने की पुरजोर कोशिश की।
कोकिला की छठी इंद्रिय ने उसे क्या बताया कि वो एक कटोरी खीर सामने पटक गई।
"हमारे मायके वालों के जाने के बाद अपने चोंचले करते रहना, वैसे भी छोटे की शादी तय हो रही है तो मैं तो दो महीने पहले ही चली जाऊंगी मायके, तब शांति से अपनी फिटनेस, डायटिंग करते रहना। सुबह सारी दुनिया वाकिंग करती है, तब तो मुँह ढांके सोते रहते हो और फिटनेस लाएंगे।"
डाइनिंग टेबल पर विविध व्यंजन सजाती उस अन्नपूर्णा को देख मधुर ने गहरी सांस रोककर, अपने पेट को सपाट दिखाने की प्रेक्टिस शुरू कर दी।
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शर्मिला चौहान
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