श्याम तेरे कितने रूप, कितने नाम?
कोई कहे तुझे मुरली मनोहर,
कोई कहे घनश्याम।
वृंदावन की कुंज गलियों में,
रहे सदा तेरा धाम।
जीवन का हर रंग है सुंदर,
चाहे सुबह या शाम,
खेलकूद कर, रास-रंग कर,
किया कर्म योग को महान।
प्यार, दोस्ती, रिश्ते-नाते
सब होते हैं जीवन में अहम्।
कृष्ण रंग है सबसे अलौकिक,
तोड़ दे सारे माया भ्रम।
बुद्धि, भक्ति और कर्म का,
जिसने किया है संगम।
गीता संदेश दिया जग को,
कहलाया पूर्ण पुरूषोत्तम ।
उद्धव का अलबेला श्याम,
गोपी जन वल्लभ है श्याम।
संतजनों के तारक श्याम,
दुष्टो के संहारक श्याम।
राधेश्याम राधेश्याम, गोपी जन वल्लभ हैं श्याम।
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शर्मिला चौहान
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