(९) संयुक्ताक्षर का मात्राभार १ (लघु) होता है , जैसे - स्वर=११ , प्रभा=१२
.... श्रम=११ , च्यवन=१११
(१०) संयुक्ताक्षर में ह्रस्व मात्रा लगने से उसका मात्राभार १ (लघु) ही रहता है , ..... जैसे - प्रिया=१२ , क्रिया=१२ , द्रुम=११ ,च्युत=११, श्रुति=११
(११) संयुक्ताक्षर में दीर्घ मात्रा लगने से उसका मात्राभार २ (गुरु) हो जाता है ,
..... जैसे - भ्राता=२२ , श्याम=२१ , स्नेह=२१ ,स्त्री=२ , स्थान=२१ ,
(१२) संयुक्ताक्षर से पहले वाले लघु वर्ण का मात्राभार २ (गुरु) हो जाता है ,
..... जैसे - नम्र=२१ , सत्य=२१ , विख्यात=२२१
(१३) संयुक्ताक्षर के पहले वाले गुरु वर्ण के मात्राभार में कोई अन्तर नहीं पडता है, ..... जैसे - हास्य=२१ , आत्मा=२२ , सौम्या=२२ , शाश्वत=२११ , भास्कर=२११.
(१४) संयुक्ताक्षर सम्बन्धी नियम (१२) के कुछ अपवाद उपरोक्त नियम के शब्द भार के अनुसार हैं, भी हैं , जिसका आधार
..... पारंपरिक उच्चारण है, अशुद्ध उच्चारण नहीं। मुख्यतः ल्ह, न्ह, म्ह के पहले अगर लघु है एवं ये भी लघु है तो पहले वाला दीर्घ हो जायगा, अगर ये दीर्घ हैं एवं पहले वाला लघु है तो भी यह लघु ही रहेगा दीर्घ नहीं बनेगा उदहारण :
तुम्हें=१२ , तुम्हारा/तुम्हारी/तुम्हारे=१२२, जिन्हें=१२, जिन्होंने=१२२, कुम्हार =१२१, कन्हैया=१२२ , मल्हार=१२१ यहाँ संयुक्त अक्षर के पहले का अक्षर लघु है फिर भी दीर्घ नहीं बना क्योंकि यहाँ ह दीर्घ है , यहाँ ह लघु है अतः संयुक्ताक्षर के पहले वाला अक्षर दीर्घ बन गया जैसे कुल्हड़=211 अल्हड 211.
+91 98602 11911: नमस्कार मैं नीरज गोस्वामी, मैंने अभी भट्ट साहब का भेजा हुआ ग़ज़ल पर लेख पढ़ा। भट्ट साहब ने अपने लेख में बहुत महत्वपूर्ण जानकारियां दी लेकिन मेरी दृष्टि में नवांकुरों के लिए यह लेख थोड़ा मुश्किल है। मैंने गजल लेखन 56 वर्ष की अवस्था में शुरू किया, इससे पूर्व यकीन मानो मुझे ग़ज़ल का कोई ज्ञान नहीं था ।आदरणीय पंकज सुबीर जी के ब्लॉक से गजल क्या है यह जानना सीखा। बाद में जब मुझे थोड़ी बहुत समझ आई तो मैंने ग़ज़ल कहना शुरू किया ।मैं आपको ग़ज़ल के बारे में बहुत साधारण जबान में समझाने का प्रयास करता हूं, ताकि वो लोग जिन्होंने ग़ज़ल के बारे में कोई जानकारी अभी तक नहीं ली है वो इससे लाभान्वित हो सकें ।
गजल में तीन बातें विशेष रुप से ध्यान रखने योग्य हैं ,पहली काफिया बंदी ,दूसरी रदीफ़ को निभाना और तीसरी बहर ।काफिया याने तुकांत शब्द। गजल के शेर में काफिये का बहुत बड़ा स्थान है आपको काफिये मिलाने पड़ते हैं, तुकबंदी करती पड़ती है जैसे कल, पल, हल, चल...जैसे दवा, हवा, घटा...आप पूछेंगे कि दवा और घटा की तुक एक कैसे हई...सही पूछा है...इसमें आ की मात्रा की तुक मिलाई गई है...इसी तरह गली ,मरी, कही भी तुकांत शब्द हैं जिनमें ई की तुक मिलाई है।
एक मशहूर शेर देखें : "दिल में इक लहर सी उठी है अभी
कोई ताजा हवा चली है अभी" इसमें उठी और चली दोनों काफिये हैं ।इसी तरह गालिब का शेर है "दिल ए नादाँ तुझे हुआ क्या है ,आखिर इस दर्द की दवा क्या है "इसमें हुआ और दवा की दोनों काफिये हैं ।'क्या है' हर शेर में आता है जिसे हम रदीफ कहते हैं । रदीफ हर शेर की दूसरी पंक्ति में काफिये के बाद आना जरूरी होता है।
अब बात करें 'बहर' की, वो दरअसल मीटर है याने शब्दों का का समूह एक विशेष गणितीय क्रम में रखा जाता है ।ये थोड़ा कॉम्प्लिकेट सब्जेक्ट है इसलिए अभी इस पर चर्चा ना करके हमें शब्दों का वज़्न यानी कि भार जानना जरूरी होगा ।अब आप पूछेंगे किस शब्द का भार क्या? तो कोई भी शब्द जिसमें मात्रा लगती है उसका भार हम मानते हैं 2 इसे हम गुरु कहते हैं, बिना मात्रा का अक्षर लघु कहलाता है।जैसे 'क' का भार 1 और 'का' भार 2 ,'कि 'का भार 1,की भार 2 छोटी मात्रा का भार 1 और बड़ी का 2 होता है । इसी तरह कोई और शब्द में जैसे कौन इसमें 'कौ' का भार 2 और न का भार 1 याने कौन का भार 21, इसका भार होगा 21.जब आप वज़्न को समझ लेंगे तो ग़ज़ल कहने में बहुत आसानी होगी अभी इतना ही।
हम शुरू में वज़्न समझने का प्रयास करेंगे।
[16/02, 09:57] +91 98602 11911: अब हम वज़्न पता लगाने का प्रयास करते हैं। ग़ज़ल का संबंध श्रवण से है इसलिए इसमें शब्द का भार जैसे हम बोलते हैं वैसे लिया जाता है। याद रखें ग़ज़ल कभी लिखी नहीं जाती कही जाती है।
मैं कुछ शब्द और उनका वज़्न लिख रहा हूँ... आप इसे गौर से पढ़ें और समझें
आम- आ+म- 2 1
रात - रा +त - 2 1
गीत - गी+त - 2 1
कील - की+ल -2 1
भूल - भू +ल - 2 1
कमी - क + मी- 1 2
गीली - गी + ली - 2 2
मिली - मि + ली - 1 2
सीखा - सी + खा - 2 2
गिरा - गि + रा - 1 2
[16/02, 10:10] +91 98602 11911: अब हम ऐसे शब्द लेंगे जिसमें तीन अक्षर आते हैं
कमाल - क+मा+ल : 1 2 1
रहीम - र + ही + म : 1 2 1
कामना - का + म + ना : 2 1 2
कीमती - की+ म + ती : 2 1 2
बारीक - बा + री + क : 2 2 1
करीबी - क+ री + बी : 1 2 2
यदि दो लघु एक साथ आएं तो वो मिलकर गुरु हो जाते हैं जैसे
हल - ह ल :11 या 2
सर - स र : 11 या 2
मिल - मि ल :11 या 2
कुछ - कु छ : 1 1 या 2
मात्रा गिनने के नियम को अब यूँ समझें
1 - सभी व्यंजन (बिना स्वर के) एक मात्रिक होते हैं
जैसे – क, ख, ग, घ, च, छ, ज, झ, ट ... आदि 1 मात्रिक हैं
2 - अ, इ, उ स्वर व अनुस्वर चन्द्रबिंदी तथा इनके साथ प्रयुक्त व्यंजन एक मात्रिक होते हैं
जैसे = अ, इ, उ, कि, सि, पु, सु हँ आदि एक मात्रिक हैं
3 - आ, ई, ऊ ए ऐ ओ औ अं स्वर तथा इनके साथ प्रयुक्त व्यंजन दो मात्रिक होते हैं
जैसे = आ, सो, पा, जू, सी, ने, पै, सौ, सं आदि 2 मात्रिक हैं।
4. - यदि किसी शब्द में दो 'एक मात्रिक' व्यंजन हैं तो उच्चारण अनुसार दोनों जुड कर शाश्वत दो मात्रिक अर्थात दीर्घ बन जाते हैं जैसे ह1+म2 = हम = 2 ऐसे दो मात्रिक शाश्वत दीर्घ होते हैं ।जिनको जरूरत के अनुसार 11 अथवा 1 नहीं किया जा सकता है
जैसे – सम, दम, चल, घर, पल, कल आदि शाश्वत दो मात्रिक हैं
5. -परन्तु जिस शब्द के उच्चारण में दोनो अक्षर अलग अलग उच्चरित होंगे वहाँ ऐसा मात्रा योग नहीं बनेगा और वहाँ दोनों लघु हमेशा अलग अलग अर्थात 11 गिना जायेगा
जैसे – असमय = अ/स/मय = अ1 स1 मय 2 = 112
असमय का उच्चारण करते समय 'अ' उच्चारण के बाद रुकते हैं और 'स' अलग अलग बोलते हैं और 'मय' का उच्चारण एक साथ करते हैं इसलिए 'अ' और 'स' को दीर्घ नहीं किया जा सकता है और मय मिल कर दीर्घ हो जा रहे हैं इसलिए असमय का वज्न अ1 स1 मय2 = 112 होगा इसे 22 नहीं किया जा सकता है क्योकि यदि इसे 22 किया गया तो उच्चारण अस्मय हो जायेगा और शब्द उच्चारण दोषपूर्ण हो जायेगा|
6. – किसी लघु मात्रिक के पहले या बाद में कोई शुद्ध व्यंजन(1 मात्रिक क्रमांक 1 के अनुसार) हो तो उच्चारण अनुसार दोनों लघु मिल कर शाश्वत दो मात्रिक हो जाता है
उदाहरण – “तुम” शब्द में “'त'” '“उ'” के साथ जुड कर '“तु'” होता है(क्रमांक २ अनुसार), “तु” एक मात्रिक है और “तुम” शब्द में “म” भी एक मात्रिक है (क्रमांक १ के अनुसार) और बोलते समय “तु+म” को एक साथ बोलते हैं तो ये दोनों जुड कर शाश्वत दीर्घ बन जाते हैं इसे 11 नहीं गिना जा सकता
इसके और उदाहरण देखें = यदि, कपि, कुछ, रुक आदि शाश्वत दो मात्रिक हैं
7.-परन्तु जहाँ किसी शब्द के उच्चारण में दोनो हर्फ़ अलग अलग उच्चरित होंगे वहाँ ऐसा मात्रा योग नहीं बनेगा और वहाँ अलग अलग ही अर्थात 11 गिना जायेगा
जैसे – सुमधुर = सु/ म /धुर = स+उ1 म1 धुर2 = 112
8- यदि किसी शब्द में अगल बगल के दोनो व्यंजन किन्हीं स्वर के साथ जुड कर लघु ही रहते हैं तो उच्चारण अनुसार दोनों जुड कर शाश्वत दो मात्रिक हो जाता है इसे 11 नहीं गिना जा सकता
जैसे = पुरु = प+उ / र+उ = पुरु = 2,
इसके और उदाहरण देखें = गिरि
9-परन्तु जहाँ किसी शब्द के उच्चारण में दो हर्फ़ अलग अलग उच्चरित होंगे वहाँ ऐसा मात्रा योग नहीं बनेगा और वहाँ अलग अलग ही गिना जायेगा
जैसे – सुविचार = सु/ वि / चा / र = स+उ1 व+इ2 चा2 र1 = 1121
10-- ग़ज़ल के मात्रा गणना में अर्ध व्यंजन को 1 मात्रा माना गया है तथा यदि शब्द में उच्चारण अनुसार पहले अथवा बाद के व्यंजन के साथ जुड जाता है और जिससे जुड़ता है वो व्यंजन यदि 1 मात्रिक है तो वह 2 मात्रिक हो जाता है और यदि दो मात्रिक है तो जुडने के बाद भी 2 मात्रिक ही रहता है ऐसे 2 मात्रिक को 11 नहीं गिना जा सकता है
उदाहरण -
सच्चा = स1+च्1 / च1+आ1 = सच् 2 चा 2 = 22
(अतः सच्चा को 112 नहीं गिना जा सकता है)
आनन्द = आ / न+न् / द = आ2 नन् 2द1= 221
कार्य = का+र् / य = कार् 2 य 1 = 21 (कार्य में का पहले से दो मात्रिक है तथा आधा र के जुडने पर भी दो मात्रिक ही रहता है)
तुम्हारा = तु/ म्हा/ रा = तु1 म्हा2 रा2 = 122
तुम्हें = तु / म्हें = तु1 म्हें2 = 12
उन्हें = उ / न्हें = उ1 न्हें2 = 12
11-अपवाद स्वरूप अर्ध व्यंजन के इस नियम में अर्ध स व्यंजन के साथ एक अपवाद यह है कि यदि अर्ध स के पहले या बाद में कोई एक मात्रिक अक्षर होता है तब तो यह उच्चारण के अनुसार बगल के शब्द के साथ जुड जाता है परन्तु यदि अर्ध स के दोनों ओर पहले से दीर्घ मात्रिक अक्षर होते हैं तो कुछ शब्दों में अर्ध स को स्वतंत्र एक मात्रिक भी माना लिया जाता है
जैसे = रस्ता = 1+स् 1/ ता2= 22 होता है मगर रास्ता = रा/स्/ता = 212 होता है
दोस्त = दो+स् /त= 21 होता है मगर दोस्ती = दो/स्/ती = 212 होता है
इस प्रकार और शब्द देखें
बस्ती, सस्ती, मस्ती, बस्ता, सस्ता = 22
दोस्तों = 212
मस्ताना = 222
मुस्कान = 221
संस्कार= 2121
12 - संयुक्ताक्षर जैसे = क्ष, त्र, ज्ञ द्ध द्व आदि दो व्यंजन के योग से बने होने के कारण दीर्घ मात्रिक हैं परन्तु मात्र गणना में खुद लघु हो कर अपने पहले के लघु व्यंजन को दीर्घ कर देते है अथवा पहले का व्यंजन स्वयं दीर्घ हो तो भी स्वयं लघु हो जाते हैं
उदाहरण = पत्र= 21, वक्र = 21, यक्ष = 21, कक्ष - 21, यज्ञ = 21, शुद्ध =21 क्रुद्ध =21
गोत्र = 21, सूत्र = 21,
13-यदि संयुक्ताक्षर से शब्द प्रारंभ हो तो संयुक्ताक्षर लघु हो जाते हैं
उदाहरण = त्रिशूल = 121, क्रमांक = 121, क्षितिज = 12
14- संयुक्ताक्षर जब दीर्घ स्वर युक्त होते हैं तो अपने पहले के व्यंजन को दीर्घ करते हुए स्वयं भी दीर्घ रहते हैं अथवा पहले का व्यंजन स्वयं दीर्घ हो तो भी दीर्घ स्वर युक्त संयुक्ताक्षर दीर्घ मात्रिक गिने जाते हैं
उदाहरण =
प्रज्ञा = 22 राजाज्ञा =222, पत्रों = 22
15- उच्चारण अनुसार मात्रा गणना के कारण कुछ शब्द इस नियम के अपवाद भी है -
उदाहरण = अनुक्रमांक = अनु/क्र/मां/क = 2121('नु' अक्षर लघु होते हुए भी 'क्र' के योग से दीर्घ नहीं हुआ और उच्चारण अनुसार अ के साथ जुड कर दीर्घ हो गया और क्र लघु हो गया।
[20/02, 11:20] कविता की पाठशाला नीरज सर: आपको पता है कि:
1 - सभी व्यंजन (बिना स्वर के) एक मात्रिक होते हैं।
जैसे – क, ख, ग, घ, च, छ, ज, झ, ट ... आदि 1 मात्रिक हैं
2 - अ, इ, उ स्वर व अनुस्वर चन्द्रबिंदी तथा इनके साथ प्रयुक्त व्यंजन एक मात्रिक होते हैं
जैसे = अ, इ, उ, कि, सि, पु, सु हँ आदि एक मात्रिक हैं
3 - आ, ई, ऊ ए ऐ ओ औ अं स्वर तथा इनके साथ प्रयुक्त व्यंजन दो मात्रिक होते हैं
जैसे = आ, सो, पा, जू, सी, ने, पै, सौ, सं आदि 2 मात्रिक हैं
इनमें से केवल आ ई ऊ ए ओ स्वर को गिरा कर 1 मात्रिक कर सकते है तथा
:: ऐसे दीर्घ मात्रिक अक्षर को गिरा कर 1 मात्रिक कर सकते हैं जो "आ, ई, ऊ, ए, ओ" स्वर के योग से दीर्घ हुआ हो
:: अन्य स्वर को लघु नहीं गिन सकते न ही ऐसे अक्षर को लघु गिन सकते हैं जो ऐ, औ, अं के योग से दीर्घ हुए हों
उदाहरण =
मुझको :22 को मुझकु 2 1 कर सकते हैं
आ, ई, ऊ, ए, ओ, सा, की, हू, पे, दो आदि को दीर्घ से गिरा कर लघु कर सकते हैं परन्तु ऐ, औ, अं, पै, कौ, रं आदि को दीर्घ से लघु नहीं कर सकते हैं
स्पष्ट है कि आ, ई, ऊ, ए, ओ स्वर तथा आ, ई, ऊ, ए, ओ तथा व्यंजन के योग से बने दीर्घ अक्षर को गिरा कर लघु कर सकते हैं
5 - यदि किसी शब्द में दो 'एक मात्रिक' व्यंजन हैं तो उच्चारण अनुसार दोनों जुड कर शाश्वत दो मात्रिक अर्थात दीर्घ बन जाते हैं जैसे ह1+म1 = हम = 2 ऐसे दो मात्रिक शाश्वत दीर्घ होते हैं जिनको जरूरत के अनुसार 11 अथवा 1 नहीं किया जा सकता है
जैसे – सम, दम, चल, घर, पल, कल आदि शाश्वत दो मात्रिक हैं,
ऐसे किसी दीर्घ को लघु नहीं कर सकते हैं|
दो व्यंजन मिल कर दीर्घ मात्रिक होते हैं तो ऐसे दो मात्रिक को गिरा कर लघु नहीं कर सकते हैं ।
उदहारण = कमल की मात्रा 12 है इसे क1 + मल2 = 12 गिनेंगे तथा इसमें हम मल को गिरा कर 1 नहीं कर सकते अर्थात कमाल को 11 अथवा 111 कदापि नहीं गिन सकते।
[20/02, 11:20] कविता की पाठशाला नीरज सर: ग़ज़ल सीखने की और चलिए अब अगला कदम बढ़ाते हैं। आज हम बात करते हैं मात्रा गिराने की। अब आप कहेंगे कि, अभी तक आप मात्र भार सिखा रहे थे अब गिराने की बात कर रहे हैं । ग़ज़ल लेखन की तकनीक ये सुविधा या छूट आपको देती है कि आप कुछ अक्षरों की जो की दीर्घ हैं मात्रा गिरा कर उन्हें लघु कर सकते हैं ।याने जिनका मात्रा भार 2 है उस को 1 माना जा सकता है ।अब सवाल यह उठता है कि वो दीर्घ कौन से हैं जिन्हें हम गिराकर एक कर सकते हैं ।
इस बात को एक आप कहीं नोट करलें ताकि ग़ज़ल कहते वक्त जरूरत पड़ने पर चाहें तो इस छूट का लाभ ले सकें...
[20/02, 11:40] कविता की पाठशाला नीरज सर: जैसा कि मैंने बताया:
आ, ई, ऊ, ए, ओ के संयोग से बनी दीर्घ मात्रा को गिरा कर लघु किया जा सकता है किन्तु ऐ, औ, अं को किसी भी स्थिति में गिराया नहीं जा सकता हालाँकि अपवाद स्वरूप कुछ को इससे छूट भी प्राप्त है। इन अपवाद में - है, हैं, मैं, और शामिल हैं।
सबसे अधिक जो गिराए जाते हैं वे हैं - तो, को, जो, ये, में आदि।
साथ ही यह ध्यान रखना भी आवश्यक है कि किसी भी शब्द के अंत का ही दीर्घ गिरता है आरंभ का नहीं।
किन्तु कुछ अपवाद वाले शब्द यहाँ भी हैं जिनमें सुविधानुसार आदि या अंत किसी की भी मात्रा गिराई जा सकती है जैसे - कोई, मेरी, तेरी। आपने शायद देखा होगा कि शायर इन के लिए कुई, मिरी या तिरी का प्रयोग करते हैं जबकि ऐसा करने की जरूरत नहीं होती। खैर।
सबसे अधिक ध्यान देने योग्य बात यह कि किसी भी संज्ञावाचक शब्द और हिंदी के तत्सम शब्दों की मात्रा नहीं गिराई जा सकती। हालाँकि अब कई लोग तत्सम शब्दों की मात्रा भी गिराने लगे हैं और इसे स्वीकार भी किया जाने लगा है।
जिसकी लाठी उसकी भैंस का चलन हर क्षेत्र में है...बड़े शायर अक्सर नियमों की धज्जियाँ उड़ाते देखे गये हैं ...हम लोग क्योंकि कि अभी नौसीखिए हैं इसलिए नियमों का यथासंभव पालन करेंगे।😊
याद है हमने ग़ज़ल की कक्षा की शुरुआत शब्दों का मात्रा भार जानने से की थी। तब का सीखा अब यहाँ काम में लेते हैं और इस पूरे मिसरे याने पंक्ति का मात्रा भार निकालते हैं।
बहारों: 122
फूल: 21
बर सा ओ: 222
मिरा(मेरा): 12
महबूब: 221
आया: 22
है:2
पूरी पंक्ति का मात्रा भार हुआ
122 21 222 12 221 222
ठीक है न?
इसमें गौर से देखें तो पाएंगे कि इस पंक्ति या मिसरे में लघु और दीर्घ अक्षर एक विशेष क्रम में रखें गये हैं जिसे यूँ लिखने से बात स्पष्ट हो जाएगी
1222 1222 1222 1222
कोइ शक ?😁
लघु दीर्घ का ये क्रम एक अत्यधिक प्रचलित बहर है ।बस इस क्रम को याद रखें और चाहें तो कोई भी नाम दें।क्रम याद रखना जरूरी है नाम कुछ भी हो।
अब इस गीत का दूसरा मिसरा लें
*हवाओं रागिनी गाओ मिरा(मेरा) महबूब आया है*
इसका मात्रा भार निकालें
हवाओं: 122
रागिनी : 212
गाओ: 22
मिरा(मेरा): 12
महबूब: 221
आया: 22
है:2
पूरी पंक्ति का मात्रा भार हुआ
1222 1222 1222 1222
बहारों फूल बरसाओ मेरी महबूब आया है
1222 1222 1222 1222
हवाओं रागिनी गाओ मेरा महबूब आया है
1222 1222 1222 1222
ये हुआ ग़ज़ल का मतला जिसके काफिये की ध्वनि है आओ( बरस+आओ और ग+आओ) रदीफ है मेरा महबूब आया है और बहर है 1222 1222 1222 1222
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