सारी दुनिया जिसमें समाई ,
ऐसा परम रुप तुम हो ।
अंशदायिनी जीवधारिणी ,
माँ , सब कुछ तुम ही हो ।।
हृदय में बसने वाली ,
हर श्वास प्रतिपल तुम हो ।
अमृत रस से पोषण करती ,
जीवन दायिनी तुम हो ।
स्नेहदायिनी प्रेमरुपिणी ,
माँ , सब कुछ तुम ही हो ।।
गर्भ में धारण करती जिस पल ,
उदर का पोषण करती हर क्षण ।
नवजीवन सृष्टि में लाकर ,
खुद नया जीवन धरती हो ।
ममताप्रदायिनी धैर्यधारिणी ,
माँ , सब कुछ तुम ही हो ।।
रक्त , अस्थि , मज्जा सब तेरी
मेरा मुझसे कुछ भी नहीं ।
प्राण , हृदय स्पंदन तुझसे
पहचान मेरी बिन तेरे नहीं ।
जन्मदायिनी रूप प्रदायिनी
माँ , सब कुछ तुम ही हो ।।
जीवन दात्री , जीवन सार हो ,
समग्र सृष्टि का जीवन आधार हो ।
कहां कुछ तुमसे सुंदर देखूं ,
सुंदरतम तुम हर बार हो ।
शुभदायिनी मंगलप्रदायिनी
माँ, सब कुछ तुम ही हो ।।
जब तक जीवन क्रम निरंतर ,
हर क्षण ऋणी मैं माँ तब तक ।
चरण कमल में झुका रहूं मैं ,
दे दे आशीर्वाद अनवरत ।
मोक्षदायिनी वरप्रदायिनी ,
माँ , सब कुछ तुम ही हो ।
माँ , सब कुछ तुम ही हो ।।
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