बुधवार, 8 मई 2019

" माँ , सब कुछ तुम ही हो "

सारी दुनिया जिसमें समाई ,
ऐसा परम रुप तुम हो ।
अंशदायिनी जीवधारिणी ,
माँ , सब कुछ तुम ही हो ।।

हृदय में बसने वाली ,
हर श्वास प्रतिपल तुम हो ।
अमृत रस से पोषण करती ,
जीवन दायिनी तुम हो ।

स्नेहदायिनी  प्रेमरुपिणी  ,
माँ , सब कुछ तुम ही हो ।।

गर्भ में धारण करती जिस पल ,
उदर का पोषण करती हर क्षण ।
नवजीवन सृष्टि में लाकर ,
खुद नया जीवन धरती हो ।

ममताप्रदायिनी  धैर्यधारिणी ,
माँ , सब कुछ तुम ही हो ।।

रक्त , अस्थि , मज्जा सब तेरी
मेरा मुझसे कुछ भी नहीं ।
प्राण ,  हृदय स्पंदन तुझसे
पहचान मेरी बिन तेरे नहीं ।

जन्मदायिनी रूप प्रदायिनी
माँ , सब कुछ तुम ही हो ।।

जीवन दात्री , जीवन सार हो ,
समग्र सृष्टि का जीवन आधार हो ।
कहां कुछ तुमसे सुंदर देखूं  ,
सुंदरतम तुम हर बार हो ।

शुभदायिनी मंगलप्रदायिनी
माँ, सब कुछ तुम ही हो ।।
जब तक जीवन क्रम निरंतर ,
हर क्षण ऋणी मैं माँ तब तक ।
चरण कमल में झुका रहूं मैं ,
दे दे आशीर्वाद अनवरत  ।

मोक्षदायिनी वरप्रदायिनी ,
माँ , सब कुछ तुम ही हो ।
माँ , सब कुछ तुम ही हो ।।

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