कोई कहता है तो कहानी है
सुनता है कोई
हर जुबां से निकली
अपने हिस्से में आए,
तजुर्बे की जुबानी...
अच्छी-खासी बन जाती है ,
कभी बनते बनते
बिगड़-सी जाती है ।
बिगड़ी बनाने की ही
अनगढ़ अनूठी किसकी
किसको सुनानी...
फलसफा किसी के लिए
कहकशां हैं कहीं ,
कायदे कभी बन जाती
कहीं वायदे ,
जहांँ जैसी है बस्स
हरदम है निभानी ...
नजर नहीं
नज़रिया ही है जिंदगानी ।।
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