2122 1212 22
दौर आया फ़िज़ूल गानों का
वक्त थम सा गया घरानों का।।1।।
देख दुश्मन को सामने अपने
जोश बढ़ जाता है जवानों का।।2।।
देर हो जाती है पहुँचने में
अब ठिकाना नहीं उड़ानों का।।3।।
चंद बातों से टूटते रिश्ते
घर तो बस नाम है मकानों का।।4।।
सालभर काम करते खेतों में
देवता नाम उन किसानों का।।5।।
आप ही अपने से लड़ा करते
बस यही काम है दिवानों का।।6।।
गीत कविता ग़ज़ल हो चाहे वो
काम तो हर जगह तरानों का।।7।।
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शर्मिला चौहान
ठाणे (महाराष्ट्र )
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