फ़िलबदीह 31
दूसरा चरण
212 212 212 2
दिल के सागर में तुमको बसाया
प्यार का मोती गहरे छुपाया।।1।।
डायरी दिल की कोरी पड़ी थी
गीत ग़ज़लों से मैंने सजाया।।2।।
दिल की बंजर ज़मीं पर तुम्हारी
फूल चाहत का मैंने खिलाया।।3।।
थे भटकते कभी दर-बदर तुम
प्रेम का मैंने तब घर बनाया।।4।।
अपनी पलकों में तुमको छिपाकर
ख़्वाब जीवन का सुंदर दिखाया।।5।।
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शर्मिला चौहान
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