शुक्रवार, 7 जुलाई 2023

कविता _मुलाकात होनी चाहिए

कविता

कदमों से पगडंडियों की बात होनी चाहिए
हर कदम की घर से  फिर मुलाकात होनी चाहिए।।

झूमती शाखों की वो शोख अदाएं
झील की तलहटी में हलचल मचाएं।
और किनारों पर खड़े ये मौन पत्थर
ताकते रहते मछलियां खूबसूरत।

प्रेम की हर तरफ बरसात होनी चाहिए।
हर कदम की घर से फिर मुलाकात होनी चाहिए।।


झील के आँचल में बतखों का किलकना
हवा के पर पसारे पंछियों का चहकना।
भोर में चमकती सूरज की ख्वाहिशें,
घास पर मचलती ओस की नर्म फरमाइशें।

चाँद तारे सूरज से मिलें वो रात होनी चाहिए।
हर कदम की घर से फिर मुलाकात होनी चाहिए।।

श्वेत साफे बाँध तटों पर खड़े हैं,
शरद के स्वागत में कांस डटे पड़े हैं।
चाँद उतरा झील में कुछ झांँकता है,
कुमुदिनी को भोर तक वह ताकता है।।

शुभ बेला तारों की बारात होनी चाहिए।
हर कदम की घर से फिर मुलाकात होनी चाहिए।।

जवान फसलें खेतों में जब गुनगुनातीं,
गेहूँ संग सरसों हल्दी तब लगाती।
 गुलाबी साफा बाँध चना इठलाने लगा,
नीली अलसी का तन मन रिझाने लगा।

प्रेम पगी रस्मों की शुरुआत होनी चाहिए,
हर कदम की घर से फिर मुलाकात होनी चाहिए।।


शर्मिला चौहान

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