संशोधित ग़ज़ल (१५/४/२०२३)
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चुने काफ़िए जो निभाती ग़ज़ल है
वही क़द्रद्राँ भी बनाती ग़ज़ल है।।1।।
खुशी ग़म उदासी हो जैसा भी मौसम
उसी रंग में डूब जाती ग़ज़ल है।।2।।
चले जाते जो छोड़कर दूर इसको
कशिश से उन्हें भी बुलाती ग़ज़ल है।।3।।
नशा है या जादू मज़ा कुछ अनोखा
अलग सी करीबी बढ़ाती ग़ज़ल है।।4।।
कही दिल से जाती सुनी दिल से जाती
कि दिल से ही दिल में समाती ग़ज़ल है।।5।।
लगी थी कठिन पर अभी मैंने जाना
सरलता से अपनी लुभाती ग़ज़ल है।।6।।
छलकती खुशी "शर्मिला" की जो दिल से
तो हौले से वो गुनगुनाती ग़ज़ल है।।7।।
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शर्मिला चौहान
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