पटल पर अपनी उपस्थिति दर्ज कराती मेरी एक प्रस्तुति 🙏
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विविध फूल सुंदर खिलें नित चमन में
धरा देख उनको रहे मन मगन में।।१।।
कली मुस्कुराती प्रणय राग सुनकर
गजब का है जादू भ्रमर की छुअन में।।२।।
शिखर गर्व करता दिखूँ सबसे सुंदर
दबी मौन है नींव नीचे भवन में।।३।।
लिए है परीक्षा चतुर्थी का चंदा
कमी ना दिखाती ये ललना लगन में।।४।।
दिखे चाँद दूधिया सराहे ये दुनिया
सितारों से रौनक बढ़ी है गगन में।।५।।
लगे दिल को अपना हमेशा से चंदा
करे शीत मन को विरह की तपन में।।६।।
हवा खाद पानी ज़रूरी तरू को
पनपते न पौधे कभी भी सघन में।।७।।
शर्मिला चौहान
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