मनहरण घनाक्षरी
बड़ा शुभ चैत मास, नवमी तिथि है खास।
सबके हृदय आस, राम जन्म आज है।
सांवली सूरत प्यारी, मारे हंँस किलकारी।
मोहनी मूरत देखो, सुंदर रूप साज है।
अवध में छाई धूम, बधाई दें घूम घूम।
घर घर लड्डू बंटें, शगुन का काज है।
चंदन का पलना है, राम प्यारा ललना है।
कौशल्या झुलाए डोर,ममता का राज है।
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मनहरण घनाक्षरी
ब्याह की हुई तैयारी, मिथिला सजी निराली।
शिव धनु तोड़ें हम, सबने ये ठान ली।
मुनि संग आए राम, तोड़ा चाप बढ़ा मान।
जानकी के हृदय की,रामजी ने जान ली।
जनक की प्यारी लली, सीता सुकुमारी चली।
सारी सीख जननी की, बिटिया ने मान ली।
परछन थाल सजी, ढ़ोल शहनाई बजी।
अवध की बहू सीता, सासूओं से ज्ञान ली।
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मनहरण घनाक्षरी
कैकयी ने मांगा वर, रामजी ने छोड़ा घर।
लखन सिया के संग, चले वन राह हैं।
धरे वेष मुनियों का, करें काम क्षत्रियों का।
रहूँ मिल सब संग, करें यही चाह हैं।
पंचवटी आए राम, राक्षसों को भेजा धाम।
ऋषियों की रक्षा करें, बोलें सब वाह हैं।
केवट गले लगाए, शबरी के बेर खाए।
सुग्रीव से की मिताई, धर लिए बांह हैं।
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कृपाण घनाक्षरी
आई सेना सेतु पार, वानर दल अपार।
दानवों पे किए वार, लंका में मची है रार।
बड़े बड़े हथियार, तीर भाला तलवार।
पत्थर फेंके हजार, दुष्टों का हुआ संहार।
रावण का अहंकार, हर लाया सीता नार।
रामजी ने दिया मार, बताया जीवन सार।
लंका का शासन भार, विभीषण है तैयार।
दशहरे का त्यौहार, रामजी की जयकार।
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रुप घनाक्षरी
पुष्पक विमान चढ़, पहुँचे अयोध्या गढ़
नगर में दीप जलें, गली गली बाजे ढो़ल।
आकुल हैं जन जन, राम की लगी लगन
राह निहारे सब, नैनों के किवाड़ खोल।
खुश हुईं महतारी, तिलक की है तैयारी
नैनन से आँसू गिरें, बिके सब बिना मोल।
राम दरबार साजे, ढ़ोल ताशे खूब बाजे
राम के चरण दाबे, जय हनुमान बोल।
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