शुक्रवार, 5 जून 2026

कुंडलियां

[05/06, 12:24] Sharmila Chouhan: 1 .   मेघ

काले मेघा छा रहे, जन जीवन की आस।
लाते जल भरकर कलश, बुझे जीव की प्यास।।
बुझे जीव की प्यास, वसुधा भी तृप्ति पाती।
आँचल में भर नेह, हरी हो वह मुस्काती।।
बैलों को ले साथ, चलें किसान मतवाले।
उमड़-घुमड़ बरसात, बरसते मेघा काले।।

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[05/06, 12:24] Sharmila Chouhan: 2 .    बचपन

सारे बंधन से अलग, बच्चों की है जात।
जीवन बचपन का सहज, कोमल मन की बात।।
कोमल मन की बात, प्रेम की दुनिया सारी।
दौलत का ना मोल, अनूठी भोली न्यारी।।
मित्रों से संसार, बनाते रिश्ते प्यारे।
बचपन के दिन चार, तोड़ दे बंधन सारे।।

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[05/06, 12:24] Sharmila Chouhan: 3 .     माता

माता का नाता सदा, जग में बड़ा महान।
पाले पोसे कोख में, देती जीवन दान।।
देती जीवन दान, प्रसव की सहती पीड़ा।
बालक करे विकास, उठाती जननी बीड़ा।।
बच्चों में ही प्राण, सदा उनका हित भाता।
धन्य वही इंसान, जिसके पास है माता।।

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[05/06, 12:24] Sharmila Chouhan: 4 .     नदी

ऊँचे पर्वत से उतर, आई वसुधा गोद।
सागर पिय को ढूंढ़ती, भरी छलकती मोद।।
भरी छलकती मोद, समेटे निर्मल धारा।
दोनों ओर किनार, नीर पीता जग सारा।।
वर्षा उछले धार, बहे गर्मी में नीचे।
नदियों का उपकार, विचार सिखाती ऊँचे।।

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[05/06, 12:24] Sharmila Chouhan: 5 .     जीवन

छाया धूप है बिखरी, जीवन ऐसा गाँव।
सुख-दुख में चलता रहे, लगा वक्त के पाँव।।
लगा वक्त के पाँव, स्वयं से होड़ लगाता।
बहे अश्रु की धार, कभी मुस्काता आता।।
चलता यह निर्बाध, दिखाता अपनी माया।
जीवन का यह सार, सहेज लो धूप-छाया।।

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[05/06, 12:24] Sharmila Chouhan: 6 .      बेटा-बेटी

बेटी बेटा एक सम, दोनों संतति रूप।
मान बढ़ाते वंश का, सुंदर भाव अनूप।।
सुंदर भाव अनूप, दोनों हृदय को भाते।
उत्तम गुण संस्कार, काम अच्छे कर पाते।।
बेटे गुणों की खान, बेटियाँ प्रेमल पेटी।
खूब कमाएँ नाम, जगत में बेटा बेटी।।

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[05/06, 12:24] Sharmila Chouhan: 7 .  भाषा

भाषा अपनी प्राण सम, माँ ने दी पहचान।
संग सजी सब बोलियांँ, भारत की हैं शान।।
भारत की हैं शान, प्यार अपनापन भरतीं।
बहता सहज प्रवाह, ज्ञानमय दुनिया करतीं।।
सीखो जितना खूब, सब पर और उपभाषा।
करना कभी न त्याग, बोलो सदा निज भाषा।।

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[05/06, 12:24] Sharmila Chouhan: 8 . पुस्तक 

पुस्तक सागर ज्ञान की, डूब सके तो डूब।
मोती जीवन के भरे, होगी कभी न ऊब।।
होगी कभी न ऊब, साथी यही है सच्ची।
बुद्धि को दे ख़ुराक, कराती माथा पच्ची।।
खुलते ज्ञान कपाट, शब्द जब देते दस्तक।
शर्मिला कहे बात, साथ में रखना पुस्तक।।

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[05/06, 12:24] Sharmila Chouhan: 9 .  फोन

नवयुग की नव देन है, यह मोबाइल फोन।
जैसी मर्ज़ी आदमी, बदलता रिंग टोन।
बदलता रिंग टोन, झटपट मैसेज देखे।
घड़ी घड़ी की रील, दिखाता खुद के लेखे।। 
फोन बना जासूस, आया घोर अब कलयुग।
सबके हाथों बैंक, सिखाता सबकुछ नवयुग।।

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[05/06, 12:25] Sharmila Chouhan: 10 . छाता 

छाता उपयोगी बहुत, हर  मौसम की शान।
गर्मी बारिश में सदा, रखता सबका मान।।
रखता सबका मान, रहे फैशन में आगे।
काला या रंगीन, ग्राहक सोचकर मांगे।।
शाला दफ्तर हाट, बैठ कांधे पर आता।
कहे 'शर्मिला' बात, साथ में  रखना छाता।।

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[05/06, 12:25] Sharmila Chouhan: 11 . चिंता 

सारी दुनिया फेर में, चिंता है दिन-रात।
आती नित नव रूप में, बढ़ जाती जब बात।।
बढ़ जाती जब बात, मन को चैन ना आए।
होता चित्त अधीर, हल जब तक नहीं पाए।।
होते सभी शिकार, बच्चे नर और नारी।
ढूंढ़ रहे सब राह,‌ चिंताएं खूब सारी।।

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[05/06, 12:25] Sharmila Chouhan: 12 . निंदा

मानव मन का भाव है, निंदा सबद रसाल।
निंदा रस का दायरा, होता बहुत विशाल।।
होता बहुत विशाल, क्षणिक सुख दे जाता है।
निंदा से हो तृप्त, आदमी सो पाता है।।
निंदा ऐसी सोच, आदमी बनता दानव।
पकड़ो अपने कान, बनो तुम पहले मानव।।

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[05/06, 12:25] Sharmila Chouhan: 13 . समय

दुनिया में बलवान है, समय वक्त या काल।
चाहे कितना भी करो, समझ न आए चाल।।
समझ न आए चाल, नचाता सबको आगे।
आये कभी न हाथ, निरंतर सरपट भागे।।
कदम मिलाना साथ, कहलाते तभी गुनिया।
समय बनाता लोग, गाँव देश और दुनिया।।

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[05/06, 12:25] Sharmila Chouhan: 14 . प्रकृति 

सुंदर प्रकृति बड़ी नटी, क्षण क्षण बदले रूप।
मौसम ऋतुओं से सजी, ढलती सब अनुरूप।।
ढलती सब अनुरूप, जादू चले फिर इसका।
धरती अंबर वायु, गुणगान करते जिसका।।
पंछी नदियांँ फूल, गिरि ताल और समंदर।
शोभित है संसार, सचमुच प्रकृति है सुंदर।।

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[05/06, 12:25] Sharmila Chouhan: 15 . तुलसी 

महिमा तुलसी की बड़ी, जग में है विख्यात।
रोगों से रक्षा करे, वसुधा की सौगात।।
वसुधा की सौगात, हरिप्रिया यह कहलाती।
सनातनी के द्वार, हमेशा पूजी जाती।।
कार्तिक पावन मास, सभी पर्वों की गरिमा।
प्रबोधिनी दिन लोग, गा रहे तुलसी महिमा।।

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[05/06, 12:25] Sharmila Chouhan: 16 .  सावन

सावन की छटा अनुपम, सजे प्रकृति सुकुमार।
मरकत की चूनर पहन, शोभे रूप अपार।।
शोभे रूप अपार, नदी तालों में पानी।
झरते मोती धार, करते मेघ मनमानी।।
पूजा व्रत त्यौहार, माह यह सबसे पावन।
हल ले चले किसान, बरसता रिमझिम सावन।।

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[05/06, 12:25] Sharmila Chouhan: 17 .  बिटिया 

बिटिया चिड़िया एक सम, खेलें आँगन छाँव
मीठी बोली बोलतीं, नन्हें रखतीं पाँव।।
नन्हें रखतीं पाँव, बसेरा कुछ दिन करतीं।
नेह प्रेम का भाव, हृदय खुशियों से भरतीं।।
भवन हो घर मकान, चाहे महल या कुटिया।
सुखी वही परिवार, जहाँ हों चिड़िया बिटिया।।

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[05/06, 12:25] Sharmila Chouhan: 18 . पानी 

पानी होता सरल मन, घुले मिले सब संग।
मिलता जिसके साथ भी, ढल जाता उस रंग।।
ढल जाता उस रंग, गुण यही बड़ा निराला।
करता सबकुछ दान, बने बादल मतवाला।।
कीमत है अनमोल, बात यह जिसने जानी
बचत करें सब लोग, धरा का धन है पानी।।

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[05/06, 12:25] Sharmila Chouhan: 19 .  युद्ध 

सालों से इस देश ने, खूब सहे हैं युद्ध।
महापुरूषों ने किया, जनमानस को शुद्ध।।
जनमानस को शुद्ध, सकल जग जूझ रहा है।
वही पुरानी चाह, वर्चस्व सूझ रहा है।।
सबके अपने दाँव, रोकना हिम्मत वालों।
बनता फिर जब देश, लगते हैं कई सालों।।

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[05/06, 12:25] Sharmila Chouhan: 20 . सागर

सागर की क्षमता विपुल, सिखलाता है धीर।
अंदर जल की सृष्टि है, दिखता पर गंभीर।।
दिखता पर गंभीर, नदियाँ उसमें समातीं।
चंचल लहरें शोर, तटों पर खूब मचातीं।।
रत्नों के भंडार, छलके अमृत का गागर।
धीर वीर मतिवान, वसुधा गोद में सागर।।

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