मंगलवार, 26 सितंबर 2023

२१२२ १२१२ २२

आप सभी के समीक्षार्थ, मेरा दूसरे चरण का प्रयास सादर है।


फ़िलबदीह क्रमांक 2
दूसरा चरण 

2122  1212  22

क़ाफिया - आओं
रदीफ़ - में


हाथ उठने लगे दुआओं में
तब हुआ कुछ असर दवाओं में।।1।।

बाँसुरी बज रही कन्हैया की
राधिका नाचती लताओं में।।2।।

सांँस भारी पता नहीं क्यूँ है
कौन सा विष घुला हवाओं में।।3।।


मोम बन कर पिघल गया पत्थर
है असर तेज़ कुछ सदाओं में।।4।।


तोड़ लातीं फलक से तारे भी
ये हुनर है तो सिर्फ़ मांँओं में।।5।।


शर्मिला चौहान

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