आप सभी विज्ञजनों के समीक्षार्थ मेरा एक प्रयास प्रस्तुत है।🙏
22 22 22 22 22 22 22 2
दिल के हसीन तारों को हौले से झिंझोड़ गया
प्यार भरे अपने गीतों को मेरे लबों पे छोड़ गया।।1।।
कड़ियांँ टूट रहीं रिश्तों की बंधन कच्चे से बिखरे
टाँका प्रेम लगाकर निश्छल कोई उनको जोड़ गया।।2।।
संग लिपट सूरज के डाले बदली चितवन कजरारी
मोह भरा सूरज देखो किरणों से नाता तोड़ गया।।3।।
रिश्तों की चादर फैलाए मांगा जब तब अपनों से
खुद देने का वक्त जो आया चादर अपनी मोड़ गया।।4।।
पल पल जीवन सिक्का सोना गुल्लक में भर रखता था
आंँधी का बस एक ही झटका गुल्लक सारी फोड़ गया।।5।।
मृगतृष्णा की चाह में भटका बंजारा जीवन दर दर
पीछे देखा उसका बचपन ही सबसे बेजोड़ गया।।6।।
धन दौलत माया दरवाजा भटके महलों अंदर मन
कछुआ जाने तत्व अनोखा अपनी देह सिकोड़ गया।।7।।
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शर्मिला चौहान
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