शनिवार, 20 अगस्त 2022

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मार्गदर्शन के बाद संशोधित ग़ज़ल 🙏 धन्यवाद आदरणीय अनिल सर।



ये देश हमारा बड़ा बलवान सिपाही
सरहद पे वतन की लुटा दे जान सिपाही।।1।।

शूरों के जो किस्से सुने दादा की ज़ुबाँ से
 हित देश का बचपन में लिया ठान सिपाही।।2।।

जब प्रेम युगल गीत जुबानों पे चढ़े थे
तब गीत वतन का करे मुखगान सिपाही।।3।।

होली पे उड़े रंग गुलालों के फुहारे
निज रक्त से सीमा को रहा सान सिपाही।।4।।

जागे जो लखन सा रखे निद्रा पे कडा़ वश
सीता है धरा रूप रखे भान सिपाही।।5।‌

मौसम हो कोई भी रहे मुस्तैद सदा वो
घुटने हो जमी बर्फ़ खड़ा शान सिपाही।।6।।

जय घोष करे हिंद का दुश्मन की जमीं पे 
लिपटा जो तिरंगे में बढ़ा मान सिपाही।।7।।

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शर्मिला चौहान

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