1222 1222 1222 1222
हुई ग़लती कभी खुद से तो झुठलाया नहीं करते
दुबारा भूल से वो काम दुहराया नहीं करते।।1।।
मिले सम्मान ना कोई न आँखें नेह भीगीं हों
करीबी लाख हो रिश्ता वहाँ जाया नहीं करते।।2।।
चली जब ज़ोर की आँधी बुझे दीपक हजारों तब
अमावस मौन बैठी दीप बतियाया नहीं करते।।3।।
करें सेवा जो औरों की लुटाते प्रेम जीवन भर
बड़ाई में स्वयं के गीत वो गाया नहीं करते।।4।।
समय के साथ जो चलते लगाकर होड़ खुद से ही
मिले मंज़िल वो परचम आप फहराया नहीं करते।।5।।
सभी को साथ ले चलते रखें ना भेद कोई भी
किसी को स्वार्थ की खातिर वो बहकाया नहीं करते।।6।।
चलो आगे बढ़ें रस्ता करें तैयार मिलकर सब
नई पीढ़ी को लेने साथ शरमाया नहीं करते।।7।।
शर्मिला चौहान
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