आर... तुकांत, क़ाफ़िया
होगा...पदान्त, रदीफ़
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१) हृदय में भाव का आगार होगा
तभी भावुक सकल संसार होगा।
२) सनेही रूठ कर कोई विलग हो
गले लग नेह से मनुहार होगा।
३) कली घूंँघट उठाती जब लजाकर
करे भंवरा निवेदन प्यार होगा।
४) क्षितिज पर हाथ थामें व्योम भू जब
बरसता प्रेम जल भंडार होगा।
५) जलद आया नगाड़े ढ़ोल ले कर
धरा पर पौध नव तैयार होगा।
५) मिले अब पेट भर रोटी सभी को
क्षुधित कोई नहीं लाचार होगा।
६) बढ़े जंगल यहां सीमेंट के अब
तरू कटने कहीं लाचार होगा।
७) तिरोहित हो चला सूरज यहां से
प्रखर होगा जहां साकार होगा।
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जगत जीव माया बड़ी ही गहन है
भला कौन इसमें नहीं जो मगन है। 1।
तिमिर घोर छाए भटकता मनुज जब
तभी हौसलों की चमकती किरन है। 2।
बुराई भरी सोच आती हृदय में
सरल भाव धरकर करें फिर दहन है। 3।
बुरे वक्त में साथ देने खड़े जो
वही रूप भगवान, उनको नमन है। 4।
उजाला करे दीप छोटा जले जब
हटाता तमस ठान मन में लगन है। 5।
मिला श्रेष्ठ जीवन सभी से मनुज को
करें काज अच्छे यही तो भजन है । 6।
मधुर बोल बन कर दिखावा रिझाता
वचन सत्य की ही परख का चलन है। 7।
भरी जेब रिश्ते निभाना सरल सब
गरीबी पड़े तब न भाई बहन है।8।
सिपाही वतन के लिए जान देता
शहीदी मिले बस यही इक लगन है। 9 ।
शर्मिला चौहान