रविवार, 8 सितंबर 2019

सुषमा स्वराज जी के निधन पर ७ अगस्त २०१९

भारत में खुशी की लहर छाई है ,
लगता है मानो, आज ही स्वतंत्रता पाई है ।

भारत माता के मुकुट का हीरा धूमिल हो गया था ,
समय और परिस्थितियों में गुम हो गया था ।
आज वह फिर जगमगाने की चाहत रखने लगा है ,
भारत माता का सिर गर्व से उठने लगा है ।

अपने ही अंग को बीमार देख, वेदना से कसमसा रही थी ,
अपने ही बच्चों की तकलीफ़ पर आँसू बहा रही थी ।
रक्तपात मानो उसके हृदय में होता रहा ,
बाकी का पूरा देश चैन से सोता रहा ।

मुखर वाणी मुखर्जी की मौन हो गयी ,
'एक भारत' की चाह अटलजी के साथ खो गयी ।
ज्यों-ज्यों माँ पर अत्याचार बढ़ता  गया ,
एक सपूत उसका, त्यों-त्यों दृढ़ संकल्प लेता गया ।

करोड़ों भारतीयों की आवाज बनकर उसने ,
सारी दुनिया को बता दिया ।
अब ना कोई छू सकेगा, करनी से जता दिया ।

आज भारती गौरवान्वित हो, मुस्करा रही है ,
कश्मीर से कन्याकुमारी तक, एक नज़र आ रही है ।
'सुषमा' की प्रतीक्षा ने रंग दिखा दिया है ,
कश्मीर में तिरंगा फिर फहरा दिया है ।

अब घर के भेदी लंका नहीं ढा सकते ,
मनमानी कर, देश को बरगला नहीं सकते ।
बच्चों ने एकजुट हो बीड़ा उठा लिया है ,
मातृभूमि का फर्ज , सबने अदा किया है ।

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