बुधवार, 12 जुलाई 2017

"बात क्या है ?"

हर शख्स परेशान है कि बात क्या है ?

बात को जानना , बात की तह तक जाना ,
बातों ही बातों में , बात का बढ़ जाना ।
पता नहीं , आखिर ये बात क्या है ?

बातें अधूरी रह जाती हैं , बातें अनकही कहलाती हैं
बात का उलझ जाना, बातों में गुम हो जाना
बातों में बहल जाना,मन में ही बतियाना ।
पता नहीं, आखिर ये बात क्या है ?

बात निकलती है तो दूर तक जाती है ,
बात बढ़ाओ तो बतंगड़ बन जाती है ।
बात  में दम होना, बातों का बेबाक होना ।
बात का अंदाजा लगाना, बातों को भूल जाना
पता नहीं, आखिर ये बात क्या है ?

बना लो वक्त रहते तो बात बन जाती है ,
बिगड़ते हालात में बात ही सांँझा कराती है ।
बात ही बात में ये बात निकल आई है ,
जज़्बात ही तो बात हैं, ये बात समझ आई है ।

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