बुधवार, 11 दिसंबर 2024

212 212 212 2 पर ग़ज़ल

फ़िलबदीह 31
दूसरा चरण 


212 212 212 2

दिल के सागर में तुमको बसाया 
प्यार का मोती गहरे छुपाया।।1।।


डायरी दिल की कोरी पड़ी थी 
गीत ग़ज़लों से मैंने सजाया।।2।।

दिल की बंजर ज़मीं पर तुम्हारी 
फूल चाहत का मैंने खिलाया।।3।।

थे भटकते कभी दर-बदर तुम 
प्रेम का मैंने तब घर बनाया।।4।।

अपनी पलकों में तुमको छिपाकर 
ख़्वाब जीवन का सुंदर दिखाया।।5।।

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शर्मिला चौहान

शनिवार, 7 दिसंबर 2024

2122. 1212 22 पर ग़ज़ल

2122 1212 22

दौर आया फ़िज़ूल गानों का
वक्त थम सा गया घरानों का।।1।।

देख दुश्मन को सामने अपने
जोश बढ़ जाता है जवानों का।।2।।

देर हो जाती है पहुँचने में 
अब ठिकाना नहीं उड़ानों का।।3।।


चंद बातों से टूटते रिश्ते 
घर तो बस नाम है मकानों का।।4।।

सालभर काम करते खेतों में 
देवता नाम उन किसानों का।।5।।

आप ही अपने से लड़ा करते
 बस यही काम है दिवानों का।।6।।

गीत कविता ग़ज़ल हो चाहे वो 
काम तो हर जगह तरानों का।।7।।
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शर्मिला चौहान 
ठाणे (महाराष्ट्र )