"छप्पन भोग स्तुति"
नेह प्रेम से परसा भोजन, हम मिल तुम्हें खिलाते हैं।
रुचि रुचि भोजन करना गणपति, छप्पन भोग लगाते हैं।।
सेवा भाव से पूजें निश दिन,
अर्पण जीवन के हैं पल छिन।
प्रथम पूज्य देवा हैं गणपति,
दे दो सबको सुंदर सी मति।।
सारे जग के बुद्धि विधाता, आप ही कहलाते हैं।
रुचि रुचि भोजन करना गणपति, छप्पन भोग लगाते हैं।।१।।
प्राण प्रतिष्ठा करके गणपति,
धूप दीप नैवेद्य आरती।
भावभक्ति से ध्यावै तुमको,
दे दो अभय हस्त हम सबको।
मंगलमूर्ति हर वर्ष आपको, प्रेम भाव से लाते हैं।
रुचि रुचि भोजन करना गणपति छप्पन भोग लगाते हैं।।२।।
शुभ मंगल कारज में देवा,
ध्यान प्रथम करते नित सेवा।
दूर्वा, जसवन, पान , सुपारी
लड्डू, मोदक की छवि न्यारी।
आपके दर्शन से बप्पा, काम सफल हो जाते हैं।
रुचि रुचि भोजन करना गणपति छप्पन भोग लगाते हैं।।३।।
बालरुप है सबसे न्यारा
मात पिता संग गणपति प्यारा।
सिद्धिविनायक उमापुत्र तुम
सुमुख गजानन हो चतुर्भुज।।
दुष्टों का संहार करे जो, महागणपति कहाते हैं।
रुचि रुचि भोजन करना गणपति छप्पन भोग लगाते हैं।।४।।
दाल भात चटनी अचार घी,
विविध लड्डू पकवान मिठाई।
खीर पूरी और सब्जियांँ,
बड़े पकौड़े विविध रोटियाँ।।
चूरमा शीरा अप्पम छोले,
खिचड़ी, ढोकला और दही भल्ले।
हैं पुलाव, चावल के व्यंजन,
खाना गणपति बैठ के आसन।।
पापड सलाद रंग बिरंगे
गुलाब जामुन चाशनी भीगे।
दूध दही नींबू और नारियल,
मुख में रखना मीठा तांबूल।।
निहारिका के सारे निवासी, श्रद्धा से शीश झुकाते हैं।
रुचि रुचि भोजन करना गणपति छप्पन भोग लगाते हैं।।५।।
नेह प्रेम से परसा भोजन हम सब मिल खिलाते हैं।
रुचि रुचि भोजन करना गणपति छप्पन भोग लगाते हैं।
छप्पन भोग लगाते हैं।।
🙏गणेश भगवान की जय हो 🙏
समस्त निहारिका निवासी